पवन राजे मर्डर केस में पूर्व गृहमंत्री पद्मसिंह पाटिल काे निर्दाेष बरी कर दिया गया. सीबीआई काेर्ट ने सबूताें के अभाव में सभी 8 आराेपियाें काे बरी कर दिया. 20 साल बाद सीबीआई काेर्ट का फैसला आया. 3 जून 2006 काे नई मुंबई में पवन राजे निंबालकर व उनके ड्राइवर की हत्या हुयी थी. इस हत्याकांड के मुख्य आराेपी पद्मसिंह पाटिल थे. उन पर 25 लाख की सुपारी देकर हत्या कराने का आराेप लगा था. महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियाराें काे हिला देने वाले बहुचर्चित पवनराजे निंबालकर मर्डर केस का फैसला आखिरकार 20 साल बाद आ ही गया. स्पेशल सीबीआई काेर्ट ने पूर्व गृह मंत्री डाॅ. पद्मसिंह पाटिल समेत सभी आराेपियाें काे संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है.इससे सांसद ओमराजे निंबालकर और उनके परिवार काे बड़ा झटका लगा है. इस फैसले के बाद निंबालकर परिवार ने कहा - फैसला आश्चर्यजनक है.
काेर्ट के निर्णय काे हम हाईकाेर्ट में चुनाैती देंगे. काेर्ट ने साफ कहा कि जिस माफीनामे वाले गवाह पर इस केस की नींव रखी गई थी, उसकी गवाही भराेसेमंद नहीं थी. काेर्ट ने यह भी कहा कि जांच में गंभीर गल्तियाें, सबूताें में गड़बड़ी और पुलिस की कुछ बुनियादी गल्तियाें की वजह से सरकारी पक्ष का पूरा केस खत्म हाे गया.सीबीआई स्पेशल काेर्ट के जज एस. आर.नवंदर ने फैसला सुनाते हुए कहा, 20 साल बाद, यह फैसला सुनाते हुए काेर्ट कानून के दायरे में ही फैसला ले रहा है.यह बहुत बुरी घटना है. एक नेता काे दिनदहाड़े गाेली मार दी गई. शुरू में, जांच कलंबाेली पुलिस ने की, फिर नवी मुंबई क्राइम ब्रांच ने और फिर सीबीआई ने.इस मामले में 127 गवाहाें से पूछताछ की गई.काेर्ट ने साफ किया कि किसी भी आराेपी काे सिर्फ शक के आधार पर दाेषी नहीं ठहराया जा सकता.