आर्थिक स्थिति, दिखावा या बाहरी आकर्षण को महत्व न दे

    26-Jun-2026
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समाज, परिवार और शिक्षा व्यवस्था - तीनों की जिम्मेदारी है कि वे आने वाली पीढ़ी को केवल सफल ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, जिम्मेदार और नैतिक इंसान भी बनाएं. क्योंकि जब नैतिक मूल्य कमजोर पड़ते हैं, तब केवल व्यक्ति ही नहीं, पूरा समाज उसकी कीमत चुकाता है. इस दुखद घटना को केवल एक समाचार की तरह न देखकर, अपने परिवार और समाज को अधिक जागरूक, संस्कारित और सुरक्षित बनाने का संकल्प लें. समाज के रूप में हमें यह समझना होगा कि अच्छे संस्कार केवल उपदेशों से नहीं, बल्कि माता-पिता के आचरण, पारिवारिक वातावरण और सतत संवाद से विकसित होते हैं.  
 
नैतिक मूल्यों की कमजोरी से समाज की क्षति होती है
 भारतीय संस्कृति में पत्नी के प्रेम और समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण सावित्री को माना जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण बचाने के लिए स्वयं यमराज से संघर्ष किया था, लेकिन आज जब हम ऐसी घटनाओं की खबरें सुनते हैं, तो मन में प्रश्न उठता है कि समाज किस दिशा में जा रहा है..? किसी भी रिश्ते की नींव वेिशास, ईमानदारी और सम्मान पर टिकी होती है. यह मामला केवल एक व्यक्ति की मृत्यु का नहीं है, बल्कि उन नैतिक मूल्यों पर भी प्रश्नचिह्न है जो हमारे समाज को मजबूत बनाते हैं. हमें न्यायिक प्रक्रिया पर वेिशास रखना चाहिए और दोषी पाए जाने वालों को कठोरतम दंड मिलना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी वेिशास और प्रेम का इस प्रकार दुरुपयोग करने का साहस न कर सके. यह घटना केवल एक अपराध के बारे में नहीं बल्कि आज की परवरिश और समाज में बदलते मूल्यों पर भी प्रश्न उठाती है. आधुनिकता और स्वतंत्रता का अर्थ कभी भी जिम्मेदारी, ईमानदारी और मानवीय संवेदनाओं को त्यागना नहीं हो सकता. आज बच्चों को अच्छी शिक्षा, कैरियर और सफलता की सीख तो दी जाती है, लेकिन कई बार रिश्तों की पवित्रता, वचनबद्धता, नैतिकता और दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना उतनी गंभीरता से नहीं सिखाया जाता. परिणामस्वरूप कुछ लोग जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना धैर्य और सत्य के मार्ग से करने के बजाय गलत रास्ता चुन लेते हैं. प्रेम का अर्थ अधिकार या स्वार्थ नहीं, बल्कि सम्मान और सत्यनिष्ठा है. यदि किसी रिश्ते में असहमति हो, तो उसे बातचीत और ईमानदारी से समाप्त किया जा सकता है. किसी भी परिस्थिति में हिंसा, धोखा या अपराध का कोई औचित्य नहीं हो सकता.
- डॉ. लकीषा उपेश मर्लेचा, सामाजिक कार्यकर्ता  
 

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परिवार, संस्कार, संयम और सतर्कता आवश्यक
 पुणे के लोहगढ़ क्षेत्र में घटित दुखद घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया है. किसी भी युवा की असामयिक मृत्यु केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की क्षति होती है. इस प्रकार की घटनाएं हमें आत्मचिंतन करने और आने वाली पीढ़ी के लिए आवश्यक संस्कार एवं सावधानियों पर विचार करने का अवसर देती हैं. आज के समय में माता-पिता का दायित्व केवल बच्चों को अच्छी शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें सही जीवन-मूल्य, संयम, संवाद और जिम्मेदारी का संस्कार देना भी है. बच्चों के मित्रों, उनकी दिनचर्या, मानसिक स्थिति और सामाजिक गतिविधियों पर प्रेमपूर्वक ध्यान देना आवश्यक है. परिवार में ऐसा वातावरण होना चाहिए जहां बच्चे बिना डर के अपनी समस्याएं और भावनाएं माता-पिता से साझा कर सकें. लड़की वालों के लिए भी यह आवश्यक है कि विवाह या रिश्ते के निर्णय में केवल आर्थिक स्थिति, दिखावा या बाहरी आकर्षण को महत्व न दें. लड़के के स्वभाव, पारिवारिक वातावरण, मित्र मंडली, व्यसन-मुक्त जीवन और चरित्र की जानकारी लेना उतना ही आवश्यक है. लड़केवालों को भी अपने पुत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, जिम्मेदारी, धैर्य और नैतिकता के संस्कार बचपन से विकसित करने चाहिए. क्रोध, अहंकार, गलत संगति, नशे और हिंसक प्रवृत्तियों को कभी भी सामान्य या छोटी बात समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए. समय पर मार्गदर्शन और आवश्यकता पड़ने पर काउंसलिंग लेना भी समझदारी का कदम है. बच्चों को धर्म, करुणा, अहिंसा, संयम और मानवता के मूल्यों से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है. अपने परिवार और समाज को अधिक जागरूक, संस्कारित और सुरक्षित बनाने का संकल्प लें. यही दिवंगत आत्मा के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. गर्भ में ही संस्कार दे.
 - स्नेहल महावीर चोरडिया, भक्तामर हिलर
 

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