पुणे/मुंबई, 25 जून (आ.प्र.) राज्य के प्रवासी गैर-मराठी रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी भाषा का ज्ञान प्राप्त करने के लिए 15 अगस्त की समय-सीमा दी गई है. उन्हें यह शिक्षा प्रदान करने के लिए पुणे स्थित आरटीओ कार्यालय और आलंदी रोड पर स्थित आरटीओ कार्यालय में प्रशिक्षण कक्षाएं शुरू की गई हैं. इन कक्षाओं में 15 से 20 रिक्शाचालक ने शामिल होकर मराठी भाषा का ज्ञान लेने में अध्ययनरत हुए हैं. यात्रियों से बेहतर संवाद स्थापित करने के लिए परिवहन विभाग ने सभी गैर-मराठी रिक्शा-टैक्सी चालकों के लिए 1 जून से 15 अगस्त तक मराठी भाषा संचार पाठ्यक्रम पूरा करना अनिवार्य कर दिया है. प्रमाणपत्र न रखने वाले चालकों को 15 अगस्त के बाद कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी गई है. मराठी भाषा न बोलने वाले गैर-मराठी रिक्शाचालकों के लिए इस कार्यशाला में भाग लेना अनिवार्य कर दिया गया है. मराठी भाषा का प्रमाणपत्र न रखने वाले रिक्शा चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.जैसे कि उनके रिक्शा बैच को रद्द करना या परमिट के नवीनीकरण को निलंबित करना आदि. पुणे आरटीओ ने संगम ब्रिज स्थित अपने कार्यालय में सप्ताह में तीन दिन मराठी भाषा प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू की है. इसके लिए मोटर वाहन निरीक्षक अविनाश दलवी और नीलेश झाड़े रिक्शा चालकों को प्रशिक्षण दे रहे हैं.अविनाश दलवी ने बताया कि शफीकभाई पटेल के नेतृत्व में आजाद रिक्शा चालक संघ ने इस कक्षा को अच्छा सहयोग प्रदान किया है. संगठन के 15 से 20 रिक्शाचालक मराठी भाषा कार्यशाला में शामिल हुए है. शफीक पटेल ने कहा कि,रिक्शाचालकों की ओर से कार्यशाला को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है.लेकिन और भी रिक्शाचालकों को आगे आकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए. भविष्य में किसी भी प्रकार की कार्रवाई से बचने के लिए उन्हें इस कार्यशाला में अवश्य आना चाहिए. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के मार्गदर्शन में मुंबई में यह पहल लागू की है. परिवहन सहा.आयुक्त रवि गायकवाड़ के अनुसार, मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं और इसके लिए लगभग 71 अध्ययन केंद्र चालू किए गए हैं. मुंबई में 88,923 पंजीकृत टैक्सियां और 4,22,990 ऑटो-रिक्शा हैं. इनमें से कई वाहन उन गैर-मराठी लोगों द्वारा चलाए जाते हैं जो रोजगार की तलाश में मुंबई आए हैं. लाइसेंस की अपेक्षा भाषा को प्राथमिकता : मुंबई में आरटीओ कार्यालय अब कक्षाओं में तब्दील हो गए हैं. अंधेरी में, जहां ड्राइविंग टेस्ट आयोजित किए जाते हैं, रिक्शाचालक अब नोटबुक हाथ में लेकर मराठी वाक्यों का अभ्यास कर रहे हैं. प्रतिदिन, प्रत्येक केंद्र पर 50 से 80 चालक आते हैं. मैं कोर्स पूरा करूंगा : मैं 1991 से मुंबई में ऑटो चला रहा हूं और इतने सालों से इसी शहर में रह रहा हूं. अब कुर्ला में प्रशिक्षण ले रहा हूं. शायद मराठी भाषा सीखने से मुझे और ग्राहक मिलेंगे. मैं कोर्स पूरा करूंगा.
- मूलचंद यादव, ऑटोचालक.
कार्यशाला को अच्छा समर्थन मिला
यह कार्यशाला उन रिक्शा और टैक्सीचालकों के लिए उपयोगी साबित हो रही है जो मराठी नहीं बोल सकते. अगर वे बड़ी संख्या में इसमें भाग लेते हैं, तो यह सभी के लिए फायदेमंद होगा. कार्यशाला पंद्रह दिन पहले शुरू हुई थी और इसे अच्छा समर्थन मिला है. -स्वप्निल भोसले, उप-आरटीओ, पुणे.