जालना, 26 जून (आ.प्र.) आजकल उच्च शिक्षा और करियर की दौड़ के कारण लड़कियां देर से शादी करती हैं. इससे कई समस्याएं पैदा होती हैं. संतान प्राप्ति के प्रति बढ़ती उदासीनता और समाज की घटती आबादी जैसी गंभीर समस्याएं उन्हीं में से एक हैं. इन्हीं समस्याओं के समाधान के रूप में माहेेशरी समाज ने ‘पहले शादी करो, फिर शिक्षा लो’ का निर्णय लिया है. इस पहल के माध्यम से मराठवाड़ा के 8 जिलों में लड़की की शादी उसकी 22 वर्ष की आयु से पहले तय करने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. जो माता-पिता 22 वर्ष से कम उम्र में अपनी बेटी की शादी संपन्न करते हैं, उन्हें समाज की ओर से 51 हजार रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. माहेेशरी विवाह समिति (जालना) द्वारा वर्ष 2025 में इस पहल की शुरुआत की गई थी. पहले वर्ष, 21 वर्ष की आयु में विवाह करने वाले परिवारों को 1 लाख रुपये और 24 वर्ष की आयु में विवाह करने वालों को 31 हजार रुपये दिए गए थे. इसका लाभ 6 परिवारों ने उठाया. दूसरे वर्ष नियमों में बदलाव किया गया है. अब 22 वर्ष की आयु सीमा और 51 हजार रुपये की पुरस्कार राशि निश्चित की गई है. इस वर्ष दो परिवारों ने इसका लाभ उठाया है. समाज के बुजुर्गों का कहना है कि उच्च शिक्षा और करियर में स्थिरता पाने के प्रयास में लड़कियों की उम्र 30-32 वर्ष तक पहुंच जाती है, जिससे विभिन्न समस्याएं पैदा होती हैं.
राष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार समर्थन मिल रहा माहेेशरी विवाह समिति (जालना) के अध्यक्ष कांतिलाल राठी ने बताया है कि इस अभियान के सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं. पिछले वर्ष अखिल भारतीय माहेेशरी सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप काबरा ने इसे देश में लागू करने की आवश्यकता व्यक्त की थी. वर्तमान में इस पहल का लाभ जालना सहित मराठवाड़ा के 8 जिलों में मिल रहा है. राष्ट्रीय स्तर पर भी इसे समर्थन मिल रहा है.