आंखें की बीमारी ग्लूकाेमा : अलर्ट रहें, प्राॅब्लम दूर रहेगी

    27-Jun-2026
Total Views |
 
 

eyes 
आंखाें काे सलामत रखने से बेहतर कुछ नहीं हाे सकता.हालांकि इसके लिए आपकाे किसी आई स्पेशलिस्ट के पास रूटीन चेकअप कराना हाेगा, ताकि आपकी परेशानी काे शुरुआत में ही ट्रैक करके इसका इलाज किया जा सके. वरना आपकी आंखाें काे भी नुकसान पहुंच सकता है. खासताैर पर अगर आपकाे ग्लूकाेमा यानी कि काला माेतिया है, ताे आप धीरे-धीरे अंधे हाे सकते हैं. जबकि इसके लक्षणाें का आपकाे काफी देर से पता लगता है.माना जाता है कि भारत में 40 साल की उम्र के लगभग 22 लाख लाेग ग्लूकाेमा से पीड़ित है. दरअसल, इस कंडिशन में ऑप्टिक नर्व (आंखाें से दिमाग काे सिग्नल भेजने वाली नर्व) डैमेज हाे जाती है. आमताैर पर ऐसा आंखाें पर ज्यादा जाेर पड़ने से हाेता है. दरअसल, ऑप्टिक नर्व काफी सेंसेटिव हाेती है, इसलिए जरा भी ज्यादा प्रेशर पड़ने पर यह ब्लाॅक हाे जाती है. कई बार फ्लड ड्रेनेज की वजह से भी ब्लाॅक हाे जाती है.
 
आई इंजरीज, एडवांस्ड कैटरे्नट, डायबिटीज, आई इनफ्लेमेशन और कई बार स्टेराॅयड्स टाइप की दवाइयां खा लेने से भी ग्लूकाेमा की शिकायत हाे जाती है. 40 साल से ज्यादा उम्र के लाेगाें काे जिनके फैमिली मेंबर्स काे पहले ग्लूकाेमा हाे चुका है, इसकी शिकायत हाेने के चांस ज्यादा रहते हैं.ग्लूकाेमा के शुरुआती लक्षण आंखाें में दर्द, भारीपन, सिर दर्द, लाइट में द्निकत महसूस हाेना, लगातार नंबर बदलना और नजर धुंधली हाेना हाेते हैं. शुरुआत में ही इसका पता लगाने के लिए रेग्युलर आई प्रेशर चेकअप, रेटिना इवैल्यूएशन और विजुअल फील्ड टेस्टिंग जरूरी है. अगर यह शुरुआती कंडीशन में हाे ताे ग्लूकाेमा काे आई ड्राॅप्स और एडवांस कंडीशन में हाेने पर लेसर और सर्जरी से ठीक किया जा सकता है.