सुप्रीम काेर्ट ने हाल ही में एक ऐसे अनाेखे भूमि विवाद पर अपना अंतिम फैसला सुनाया है, जाे देश के सभी पूर्व प्रधानमंत्रियाें के कार्यकाल का गवाह रहा है. इस 70 साल पुराने मामले की सुनवाई सुप्रीम काेर्ट की जिस पीठ ने की, उसमें जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी.अंजारिया शामिल थे. दिलचस्प बात यह है कि साल 1957 में जब यह विवाद सेल डीड से शुरू हुआ था, तब इन दाेनाें जजाें का जन्म भी नहीं हुआ था. यह दशकाें पुराना विवाद हरिद्वार के नरसीपुर कलां गांव की 15.5 बीघा जमीन से संबंधित था. इस जमीन काे अपीलकर्ता शराफतअली के पूर्वजाें ने 4 जून 1957 काे एक सेल डीड के माध्यम से खरीदा था.
सुप्रीम काेर्ट ने इस मामले में ट्रायल काेर्ट और इलाहाबाद हाईकाेर्ट के पिछले फैसलाें काे पलटते हुए पुरानी सेल डीड काे पूरी तरह से वैध करार दिया है और अपीलकर्ताओं काे जमीन का असली मालिक माना है.सुप्रीम काेर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए अहम फैसला सुनाया. इससे पहले निचली अदालत (ट्रायल काेर्ट) और हाईकाेर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अपीलकर्ता इस सेल डीड के निष्पादन काे साबित करने में विफल रहे हैं. हालांकि, सुप्रीम काेर्ट ने निचली अदालत और हाईकाेर्ट दाेनाें के निष्कर्षाें काे खारिज कर दिया.