पूरे देश के लिए अग्नि परीक्षा बनी नीट की सफलता के बाद सरकार में राहत है. मैसेजिंग एप टेलीग्राम पर प्रतिबंध भी आज से खत्म हाे जाएगा. लेकिन पेपर लीक की अफवाहाें काे राेकने के लिए टेलीग्राम के एडिटिंग फीचर पर लगाए गए सरकारी प्रतिबंध 30 जून तक जारी रहेंगे.नीट परीक्षा के पांच दिन पहले 16 जून काे केंद्र सरकार ने अंतरिम आदेश से टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाया था, जिसके खिलाफ दिल्ली हाईकाेर्ट में याचिका दायर हुई.सरकार ने टेलीग्राम के खिलाफ अंतिम आदेश पारित करने के साथ हाईकाेर्ट में लिखित जवाब भी दायर कर दिया.टेलीग्राम का मुख्य तर्क यह था कि आपत्तिजनक मैसेजाें काे राेकने के बजाय पूरे प्लेटफाॅर्म पर प्रतिबंध लगाना गलत व गैरकानूनी है. टेलीग्राम के वकीलाें और सरकार की तरफ से साॅलिसिटर जनरल और अटाॅर्नी जनरल की बहस के बाद हाईकाेर्ट ने आदेश पारित कर दिया.
इतने सारे काम दाे दिन में हाेने से यह उम्मीद की जा सकती है कि आम लाेगाें से जुड़े मुकदमाें में भी न्याय की रफ्तार तेज हाेगी. प्रतिबंध खत्म हाेने के बावजूद हाईकाेर्ट के फैसले काे टेलीग्राम या दूसरी कंपनियां सुप्रीम काेर्ट में चुनाैती जरूर देंगी. लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा, साेशल मीडिया के नियमन और साइबर अपराधाें काे राेकने के लिहाज से सरकार द्वारा पेश दस्तावेजाें और हाईकाेर्ट के फैसले का महत्व सदैव बना रहेगा. लाेकहित और देशहित से जुड़े उन मुद्दाें पर समाज और सरकार में बहस और कार्रवाई जरूरी है.दुनिया भर में टेलीग्राम के एक अरब मासिक ग्राहक हैं, जिनमें 15 कराेड़ भारत में हैं. टेलीग्राम की दुबई स्थित एलएलसी यानी विदेशी कंपनी ने दिल्ली हाईकाेर्ट में याचिका दायर की थी. आईटी इंटरमीडियरी नियमाें के तहत, टेलीग्राम कंपनी ने नाेडल, शिकायत और कंप्लायंस तीनाें तरह के अधिकारियाें की नियुक्ति का दावा कियै.
यह बात सही है, ताे फिर टेलीग्राम कंपनी के भारत स्थित कार्यालय का विवरण हाईकाेर्ट और सरकार के सामने पेश क्याें नहीं किया गया? सरकार के जवाब के अनुसार, विदेशी कंपनी संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत माैलिक अधिकाराें के उल्लंघन के लिए हाईकाेर्ट में याचिका दायर नहीं कर सकती. केंद्र सरकार ने भारत के डाटा चाेरी के आराेप में सैकड़ाें चीनी एप्स पर वर्ष 2020 में प्रतिबंध लगाया था, जिसके खिलाफ अदालताें में काेई आदेश पारित नहीं हुआ.टेलीग्राम और दूसरी विदेशी कंपनियां भारत में आईटी और श्रम कानूनाें का पालन नहीं करतीं और खरबाें की कमाई पर पूरा टैक्स नहीं देतीं. भारत में ऑफिस की स्थापना और नियमाें के पालन के बगैर विदेशी कंपनियाें काे संविधान के माैलिक अधिकाराें का संरक्षण कैसे मिल सकता है? हाईकाेर्ट ने केंद्र सरकार के उस आदेश की पुष्टि की है, जिसमें कहा गया है कि टेलीग्राम नए डार्क वेब के ताैर पर अपराधियाें का पसंदीदा नेटवर्क बन गया है.
टेलीग्राम के माध्यम से नकल माफिया, आतंकवाद, बच्चाें के अश्लील वीडियाे, वित्तीय धाेखाधड़ी, बैंकाें के म्यूल खाते, डिजिटल अरेस्ट और साइबर हमले के मामले बढ़ रहे हैं. परीक्षा माफिया से युवाओं का भविष्य खराब हाे रहा है, ताे साइबर अपराधाें से देश की अर्थव्यवस्था खाेखली हाे रही है.सवाल यह है कि नीट परीक्षा खत्म हाेने के बाद अन्य साइबर अपराधाें काे राेकने के लिए टेलीग्राम और दूसरे साेशल मीडिया प्लेटफाॅर्म के खिलाफ सरकार ठाेस कार्रवाई क्याें नहीं कर रही है? गृह मंत्रालय के नेशनल साइबर क्राइम रिर्पाेटिंग पाेर्टल (एनसीसीआरपी) के आंकड़ाें के अनुसार, टेलीग्राम के माध्यम से साल 2023 में 75,688 मामलाें में 1,359 कराेड़ रुपये, साल 2024 में 2.48 लाख मामलाें में 1,940 कराेड़ रुपये, साल 2025 में 2.75 लाख मामलाें में 3,086 कराेड़ रुपये तथा साल 2026 के शुरुआती पांच महीनाें में 88,713 मामलाें में 748 कराेड़ रुपये के फ्राॅड के मामले रिपाेर्ट किए गए.
पिछले चार वर्षाें में टेलीग्राम के माध्यम से साइबर अपराध के 6.8 लाख मामलाें में 7,133 कराेड़ रुपये के साइबर फ्राॅड हुए. सरकार ने टेलीग्राम से कहा था कि माेबाइल के आईएमईआई नंबर के आधार पर साइबर अपराधियाें के खिलाफ कार्रवाई करने की जरूरत है. सरकार ने वीपीएन के अवैध नेटवर्क के इस्तेमाल काे राेकने के लिए भी टेलीग्राम काे आदेश दिए थे. ऐसे सभी निर्देशाें काे टेलीग्राम के साथ अन्य साेशल मीडिया, यूपीआई और डिजिटल पेमेंट कंपनियाें के ऊपर सख्ती से लागू करने की जरूरत है.इस साल जून के शुरुआती 15 दिनाें में टेलीग्राम में 16,578 आतंकी समूहाें काे प्रतिबंधित किया गया, जाे नए तरीके से फिर अपराध में लिप्त हाे जाते हैं. व्यावसायिक लाभ की वजह से टेलीग्राम जैसी कंपनियां डिजिटल माफिया के मर्ज की जड़ पर प्रहार नहीं कर रहीं. -विराज गुप्ता