भारत में अब विदेशी यूनिवर्सिटी की डिग्री लेने के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं हाेगी. केंद्र सरकार अब तक 15 विदेशी विश्वविद्यालयाें काे भारत में कैंपस खाेलने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी कर चुकी है. इनमें ज्यादातर कैंपस अगस्त से पहला बैच शुरू करेंगे. शुरुआती चरण में हर कैंपस में 200 से 250 छात्राें काे दाखिला दिया जाएगा. अगले पांच सालाें में इसे बढ़ाकर हर कैंपस में सालाना 1,000 से 1,200 छात्राें तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु में यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन, ब्रिस्टल, याॅर्कइलिनाेइस टेक, लिवरपूल और विक्टाेरिया यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान अपने कैंपस खाेल रहे हैं. माैजूदा सत्र के लिए 10 हजार से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं.
विदेशी विश्वविद्यालयाें के भारतीय कैंपस में पढ़ाई, परीक्षा, मूल्यांकन और डिग्री पूरी तरह उनके हाेम कैंपस के वैश्विक मानकाें के मुताबिक हाेगी. पहले चरण में एआई, कंप्यूटर साइंस और स्टीम विषयाें पर फाेकस रहेगा. अब भारतीय छात्राें काे विदेश जाने की जरूरत नहीं हाेगी. केंद्र सरकार ने 15 विदेशी विश्वविद्यालयाें काे भारत में कैंपस खाेलने की अनुमति दे दी है. इन विश्वविद्यालयाें में से ज्यादातर अगस्त से अपने पहले बैच की शुरुआत करेंगे. इस कदम से छात्राें काे विदेश की डिग्री घर बैठे मिल सकेगी और पढ़ाई का खर्च भी 30-40% तक कम हाेगा. शुरुआत के ताैर पर हर कैंपस में 200 से 250 छात्राें काे दाखिला दिया जाएगा, और अगले पांच वर्षाें में इसे बढ़ाकर हर कैंपस में सालाना 1,000 से 1,200 छात्राें तक पहुंचाने का लक्ष्य है. विदेशी यूनिवर्सिटी के भारतीय कैंपस में अध्ययन, परीक्षा और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी तरह उनके हाेम कैंपस के वैश्विक मानकाें के अनुसार हाेगी. पहले चरण में एआई, कंप्यूटर साइंस और एसटीईएम विषयाें पर फाेकस रखा जाएगा.