राजेश ए्नसपाेर्ट लिमिटेड कंपनी द्वारा 15 लाख कराेड़ का फर्जीवाड़ा उजागर हाने से सनसनी फैल गई. सेबी द्वारा जांच के बाद चाैंकाने वाला खुलासा हुआ है. कंपनी ने कमाई के झूठे आंकड़े पेश कर निवेशकाें काे आकर्षित किया, 1035 कराेड़ के झूठे निवेश की भी पाेल खुली. कांगजाें में अफ्रीका में गाेल्ड माइंस में निवेश का दावा भी फर्जी निकला! सेबी ने राजेश ए्नसपाेरर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता पर शिकंजा कसा तथा शेयर बाजार में काराेबार करने पर राेक लगा दी दुनिया की सबसे बड़ी गाेल्ड रिफाइनरी वेलकेम्बी एसए का मालिकाना हक रखने वाली भारतीय कंपनी राजेश एक्सपाेर्ट्स लमिटेड में बड़ी वित्तीय हेराफेरी सामने आई है. सेबी की शुरुआती जांच में पता चला है की कंपनी की तरफ से कमाई के झूठे आंकड़े पेश किये गए हैं. इसके बाद शेयर मार्केट रेगुलेटर सेबी ने बड़ा कदम उठाया है.
सेबी ने राजेश एक्सपाेर्ट्स के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश मेहता पर अगले आदेश तक कंपनी के शेयराें में किसी भीतरह की ट्रेडिंग करने पर पूरी तरह से राेक लगा दी है.अपने अंतरिम आदेश में सेबी ने कंपनी काे यह भी निर्देश दिया कि वह सेबी के जांच अधिकारियाें और फाेरेंसिक ऑडिटर्स के साथ जांच में सहयाेग करे ताकि कंपनी के खाताें और बही-खाताें की अच्छी तरह जांच की जा सके. सेबी की तरफ से की गइप्रारंभिक जांच में चाैंकाने वाली जानकारी मिली है. सेबी के अनुसार राजेश एक्सपाेर्ट्स ने फाइनेंशियल ईयर 2021 से लेकर पिछले कई साल के दाैरान अपने खाताें से जुड़ी बुक्स में भारी हेरफेर किया था. सेबी काे आशंका है कि इसके दम पर कंपनी निवेशकाें काे कई साल से चूना लगा रही है.कंपनी ने विदेशाें में काम करने वाली अपनी सब्सिडियरी से हाेने वाली कमाई के आंकड़ाें काे भी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है. इसके दम पर कंपनी ने बाजार में अपनी वित्तीय स्थिति काे मजबूत दिखाया.
जब सेबी और और फाेंरेसिक ऑडिटर्स से इस बारे में कंपनी से जानकारी मांगी ताे कंपनी की तरफ से पहले जांच में सहयाेग नहीं किया गया. सेबी के आदेश के अनुसार राजेश एक्सपाेर्ट्स ने कंपनी का 97 से 99 प्रतिशत रेवेन्यू पूरी तरह फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था. आदेश में सेबी की तरफ से साफ कहा गया है कि कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2021 से फाइनेंशियल ईयर 2025 के बीच सब्सिडियरी कंपनियाें के नाम पर 15.2 लाख कराेड़ का गलत और भ्रामक आंकड़ा पेश किया. यह उसके कुल रेवेन्यू का 99.8% हिस्सा था. इस फर्जीवाड़े काे अंजाम देने का मकसद निवेशकाें और शेयर मार्केट के सामने कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ काे बहुत शानदार और बड़ा दिखाना था. इस पूरे मामले में बड़ा माेड़ तब आया जब जांच में कंपनी की तरफ से किये गए इन्वेस्टमेंट के दावाें की पाेल खुल गई.