महायुति सरकार की किसान कर्जमाफी याेजना महज एक दिखावा : सपकाल

    05-Jun-2026
Total Views |
 
 

loan 
देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार द्वारा घाेषित कर्जमाफी याेजना काे महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने एक क्रूर मजाक और दिखावा करार दिया है.उन्हाेंने आराेप लगाया कि सरकार ने जटिल नियमाें, शर्ताें और पात्रता की बाधाएं लगाकर जानबूझकर राज्य के 50 प्रतिशत से अधिक किसानाें काे इस याेजना से बाहर कर दिया है. कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार काे बिना किसी शर्त के सभी किसानाें का 7/12 रिकाॅर्ड पूरी तरह कर्जमुक्त करना चाहिए.सपकाल ने कहा कि यह याेजना केवल 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2025 के बीच लिए गए और बकाया हुए फसल ऋण तथा पुनर्गठित ऋणाें तक ही सीमित है. जिन किसानाें के पास इससे पुराना कर्ज बकाया है, वे इससे पूरी तरह वंचित रह गए हैं, जबकि ऐसे किसानाें की संख्या बहुत बड़ी है.
 
इसके अलावा, कुएं, पाइपलाइन और पशुपालन (गाय-भैंस खरीदने) के लिए लिए गए अन्य कृषि ऋणाें काे भी इस दायरे े बाहर रखकर किसानाें के साथ अन्याय किया गया है.नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानाें की उपेक्षा पर सवाल उठाते हुए उन्हाेंने कहा कि प्राेत्साहन राशि पाने के लिए तीन साल में से किन्हीं दाे वर्षाें में समय पर भुगतान और आगामी वर्षाें (2025-26 व 2026-27) में भी समय पर भुगतान की कड़ी शर्तें लगाई गई हैं.इतनी जटिल प्रक्रिया के बाद भी उन्हें मात्र 50 हजार रुपये की बेहद मामूली प्राेत्साहन राशि दी जा रही है.सपकाल ने महायुति सरकार काे किसान विराेधी बताते हुए कहा कि जिस तरह लाडकी बहिन याेजना में पात्रता के नाम पर 80 लाख महिलाओं काे लाभ से वंचित किया गया, ठीक उसी तरह अब किसानाें काे भी नियमाें की कैंची में फंसाया जा रहा है.