लिंगानुपात में महाराष्ट्र सबसे खराब राज्याें में शामिल

    07-Jun-2026
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पिछले सप्ताह जारी नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) सांख्यिकी रिपाेर्ट 2024 के चाैंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. रिपाेर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में पिछले एक दशक में जन्म के समय समग्र लिंग अनुपात (एसआरबी ) लगभग स्थिर (896 से बढ़कर 899) रहा है, जाे राष्ट्रीय औसत (918) से काफी नीचे है. लेकिन इसके पीछे एक बड़ी और चिंताजनक असमानता छिपी है. जहाँ ग्रामीण महाराष्ट्र में लिंग अनुपात 888 से सुधरकर 910 हाे गया है, वहीं शहरी क्षेत्राें में यह 908 से घटकर मात्र 885 पर आ गया है.शहरी इलाकाें में आई इस भारी गिरावट ने ग्रामीण क्षेत्राें के सुधार काे बेअसर कर दिया है. स्थिति इतनी गंभीर है कि महाराष्ट्र के शहराें का लिंग अनुपात (885), देश के सबसे कम लिंग अनुपात वाले राज्याें में शुमार हरियाणा के समग्र औसत (885) के बराबपहुँच गया है.
 
राष्ट्रीय स्तर पर यह प्रवृत्ति बिल्कुल उलट है, जहाँ शहरी भारत का लिंग अनुपात (928) ग्रामीण क्षेत्राें (914) से बेहतर है. लैंगिक समानता के मामले में महाराष्ट्र देश के अग्रणी राज्याें जैसे छत्तीसगढ़ (978) और केरल (974) से काेसाें पीछे छूट गया है.यह गिरावट इसलिए भी हैरान करने वाली है क्याेंकि महाराष्ट्र अन्य सामाजिक और जनसांख्यिकीय संकेतकाें पर देश में काफी बेहतर प्रदर्शन करता है.राज्य की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) प्रति महिला 1.4 बच्चे है, जाे राष्ट्रीय औसत (1.9) से काफी कम है. महिलाओं के कल्याण के मामले में भी राज्य आगे है; यहाँ महिलाओं की विवाह की औसत आय23.4 वर्ष है (राष्ट्रीय औसत 23.1) और 18 वर्ष से कम उम्र में बाल विवाह का चलन केवल 1 प्रतिशत है, जाे राष्ट्रीय औसत (2.1%) से आधा है. इसके अलावा, महाराष्ट्र में संस्थागत प्रसव का स्तर काफी ऊंचा है, हालांकि देश के अन्य हिस्साें की तुलना में यहाँ निजी अस्पतालाें पर निर्भरता (40.9 प्रतिशत) बहुत अधिक है, जाे केरल के बाद दूसरे स्थान पर है.