मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण’ याेजना के अंतर्गत चुनाव के मुहाने पर राज्य की कराेड़ाें महिलाओं काे बिना किसी शर्त के एकमुश्त लाभ दिया गया था. लेकिन अब सरकार आर्थिक बाेझ सहन नहीं कर पा रही है, इसलिए विभिन्न बहाने आगे कर महिलाओं काे अपात्र घाेषित करने की साजिश चल रही है.साथ ही 1500 रुपये के बजाय 2100 रुपये देने का वादा किया था, लेकिन दाेवर्ष बीत चुके हैं, फिर भी उसे पूरा नहीं किया गया है. श्रमिक नेता काशिनाथ नखाते ने भी सवाल उठाया कि चुनाव जीतने के लिए जाे महिलाएं ‘लाडकी बहनें’ थीं, वे आज सत्ताधारियाें के लिए पराई क्याें हाे गई हैं?
इस दाैरान ‘धाेखा मत दाे, धाेखा मत दाे, लाडकी बहनाें काे मत रुठाओ, 1500 नहीं, 2100 दाे, अपात्र महिलाओं काे पात्र कराे’ जैसे नाराें से पूरा इलाका गूंज उठा.कष्टकरी संघर्ष महासंघ महाराष्ट्र की ओर से वंचित, जरूरतमंद, श्रमिक, विधवा, अकेली, असहाय और आम गृहणियाें काे अपात्र ठहराए जाने के विराेध में शुक्रवार (5 जून) काे पिंपरीचिंचवड़ के तहसीलदार कार्यालय, निगड़ी में ‘लाड़्नया बहिणींचे रुसवा’ आंदाेलन किया गया. इस आंदाेलन में श्रमिक नेता काशिनाथ नखाते, अश्विनी मालुसरे, सुनीता पाेतदार, सुनंदा चिखले, ज्याेति म्हस्के, शुभांगी भाेसले, वर्षा नवसरे और लाला राठाैड़ शामिल हुए.