कलकत्ता हाईकाेर्ट ने गिरफ्तार आराेपियाें काे कमर में रस्सी बांधकर सड़काें पर घुमाने की घटनाओं पर शुक्रवार काे सख्त रुख अपनाया. अदालत ने इस मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस से तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपाेर्ट तलब की है.यह मामला उन घटनाओं के बाद अदालत पहुंचा, जिनमें गिरफ्तार आराेपियाें काे कमर में रस्सी बांधकर सार्वजनिक रूप से ले जाए जाने के वीडियाे साेशल मीडिया पर वायरल हुए थे. इन घटनाओं के खिलाफ एक याचिका काेलकाता हाईकाेर्ट में दायर की गई थी. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता और न्यायमूर्ति स्मिता दास दे की अवकाशकालीन खंडपीठ के समक्ष शुक्रवार दाेपहर हुई्.
सुनवाई के बाद अदालत ने राज्य पुलिस से विस्तृत रिपाेर्ट मांगी और मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की. सुनवाई के दाैरान पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी व्यक्ति पर चाहे किसी भी तरह का अपराध करने का आराेप क्याें न हाे, गिरफ्तारी के बाद उसे इस प्रकार सार्वजनिक रूप से अपमानित नहीं किया जा सकता. न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस काे आराेपी काे गिरफ्तार करने और कानून के तहत कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है. यदि अदालत में अपराध साबित हाे जाता है ताे कानून में मृत्युदंड तक का प्रावधान है, लेकिन गिरफ्तारी के नाम पर किसी आराेपी काे सार्वजनिक रूप से बदनाम करना उचित नहीं है.अदालत ने यह भी पूछा कि आराेपियाें की कमर में रस्सी बांधने की जरूरत क्याें पड़ी.