मैं भी सत्य नहीं दे सकता, यह व्य्नितगत खाेज

    08-Jun-2026
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Osho 
 
प्रश्नः मैं क्या स्वयं एक उपदेशक नहीं हूं? मैं बाेलता क्याें हूं? समझाता क्याें हूं? इस संबंध में दाे-तीन बातें समझ लेनी उपयाेगी हाेंगी. पहली बात, सभी लिखा हुआ शास्त्र नहीं हाेता और सभी बाेला हुआ उपदेश नहीं हाेता. जिस बाेलने के साथ यह आग्रह हाेता है कि यही सत्य है और इसके अतिरिक्त कुछ भी सत्य नहीं; जिस बाेलने के साथ यह आग्रह हाेता है कि जाे मैं कहता हूं उस पर इसलिए विश्वास कराे क्याेंकि मैं कहता हूं; जिस बाेलने के लिए श्रद्धा की मांग की जाती है- अंधी श्रद्धा की- वह बाेलना उपदेश बन जाता है. मेरी न ताे यह मांग है कि मैं जाे कहता हूं उस पर आप विश्वास करें; मेरी ताे मांग ही यही है कि उस पर भूल कर भी विश्वास न करें. इतना ही मेरा कहना है कि किसी भी कहने के आधार पर सत्य काे स्वीकार मत करना. मेरे कहने के आधार पर भी नहीं.सत्य ताे प्रत्येक व्यक्ति की निजी खाेज है. काेई दूसरा किसी काे सत्य नहीं दे सकता.
 
मैं भी नहीं दे सकता. सत्य नहीं जा सकता; पाया जरूर जा सकता है. इसलिए मैं जाे कह राहा हूं, उससे आपकाे काेई सत्य की शिक्षा दे रहा हूं, ऐसा नहीं है. िफर पूछा है कि ‘मैं िफर उपदेश क्याें दे रहा हूं?’न ही मुझे इसमें काेई आनंद उपलब्ध हाेता है कि आप जाे मैं कहूं उसकी प्रशंसा करें, उसके लिए तालिया बजाएं, उसका समर्थन करें. न ही मेरा यह काेई व्यायाम है. िफर, िफर भी मैं क्याें कुछ बातें कह रहा हूं?एक आदमी काे दिखाई पड़ता हाे कि आप जिस रास्ते पर जा रहे हैं वह रास्ता गड्ढाें में, कांटाें में ले जाने वाला है और वह आपसे कह दे कि इस रास्ते पर कांटें हैं और गड्ढे हैं, वह आपकाे काेई उपदेश नहीं दे रहा है. वह केवल इतना कह रहा है कि जिस रास्ते से मैं परिचित हूं, उस रास्ते पर, उसी गड्ढे में, उन्हीं कांटाें में किसी काे जाते हुए चुपचाप देख लेना अमानवीय है, अत्यंत हिंसक कृत्य है.
 
सड़क के किनारे अभी स्ट्रीट लाइट लगे हुई हैं. जिस आदमी ने सबसे पहले िफलाडेलि्फया में सबसे पहला रास्ते के किनारे का प्रकाश लगाया, वह था, बेंजामिन ्रैंकलिन. तब तक दुनिया में रास्ताें के किनारे काेई प्रकाश नहीं लगाए जाते थे.रास्ते अंधेरे हाेते थे. बेंजामिन ्रैंकलिन ने सबसे पहले अपने घर के सामने एक बत्ती लगाई, एक खंभा लगाया. पड़ाेस के लाेगाें ने कहाः क्या तुम यह दिखलाना चाहते हाे कि तुम्हारे पास पैसे हैं? क्या तुम यह दिखलाना चाहते हाे कि तुम्हारे घर में बड़ा प्रकाश है? यह प्रकाश किसलिए लगाना चाहते हाे? बेंजामिन ्रैंकलिन ने कहा कि नहीं, रास्ते पर ऊबड़-खाबड़ पत्थर हैं, रात में यात्री भटक जाते हैं, काेई गिर भी जाता है, रास्ता खाेजना मुश्किल हाे जाता है, इसलिए मैं एक प्रकाश लगाता हूं कि राह चलने वाले लाेगाें काे मेरे घर के सामने के पत्थर ताे कम से कम दिखाई पड़ें, काेई उनसे टकरा न जाए और गिर न जाए. वह बड़े धार्मिक भाव से राेज संध्या अपना दीया जला देता घर के सामने का.
 
लेकिन पड़ाेस के लाेग उसके दीये काे उठा कर ले जाते. काेई उसका दीया बुझा जाता. जिनके लिए वह दीया लगाया गया था वे ही उसकाे बुझा देते और उठा कर ले जाते, लेकिन वह राेज लगाता ही गया उस दीये काे. न ते वह प्रकाश के संबंध में काेई घाेषणा कर रहा था, न काेई प्रचार कर रहा था, लेकिन उसके ही घर के सामने लाेग अंधेरे में टकरा जाएं, यह उससे नहीं देखा गया, इसलिए वह प्रकाश का एक दीया अपने घर के सामने जलाता रहा.धीरे-धीरे लाेगाें काे बात समझ में आनी शुरू हाे गई. राहगीराें काे दूर से ही अंधेरे रास्ते पर वह प्रकाश दिखाई पड़ने लगा. और व प्रकाश राहगीराें काे कहने लगा कि आ जाओ, यहां रास्ता सुगम है. यहां प्रकाश है, अंधेरा नहीं है. यहां पत्थर दिखाई पड़ते हैं.और जब राहगीर उस प्रकाश के पास आते, ताे वह प्रकाश उनसे कहने लगा कि देख कर चलना, सामने पत्थर है, पीछे जाकर मकान में समाप्त हाे जाती है, वह काेई रास्ता नहीं है.
 
वह प्रकाश बताने लगा कि मार्ग कहां है और मार्ग कहां नहीं है. धीरे-धीरे गांव उस प्रकाश के प्रति आदर से भर गया. और धीरे-धीरे दूसरे लाेगाें ने भी अपने घराें के सामने दीये रखने शुरू कर दिए. और िफर िफलाडेलि्फया की नगर-कमेटी ने साेचा कि क्याें न सभी रास्ताें पर प्रकाश कर दिया जाए. िफर उस पूरे नगर में प्रकाश हाे गया.िफर सारी दुनिया के हर गांव के रास्ताें पर प्रकाश हाे गया.लेकिन एक आदमी ने जिसने पहली दा वह प्रकाश लगाया था, लाेगाें ने उससे पूछा ः किसलिए लगाते हाे यह प्रकाश? क्या दिखलाना चाहते हाे? और वे ही उसकाे बुझा-बुझा जाते थे. मैं काेई उपदेशक नहीं हूं, लेकिन अगर मुझे दिखता हाे कि मेरी आंखाें के सामने ही काेई अंधेरे में भटकता है, काेई पत्थर से टकराता है, और मुझे दिखता हाे कि काेई दुख और पीड़ा के मार्गाें काे चुनता है, ताे नहीं मैं उसे काेई उपदेश दे रहा हूं, लेकिन एक दीया अपने घर के सामने जरूर रखता हूं, हाे सकता है उसे कुछ दिखाई पड़ जाए.