जिले में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन को भारी रिस्पांस

प्राकृतिक खेती के माध्यम से समृद्धि की ओर बढ़ते कदम

    01-Jul-2026
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किसानों के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार लगातार विभिन्न कल्याणकारी निर्णय ले रही है. किसानों को आर्थिक राहत प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार ने कर्जमुक्ति की घोषणा की है, जिसकी क्रियान्वयन प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है. इसके साथ ही किसानों की उत्पादन लागत कम हो, खेती टिकाऊ बने और नागरिकों को विषमुक्त एवं पौष्टिक खाद्य उपलब्ध हो, इस उद्देश्य से केंद्र सरकार के राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन का राज्य में प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है. आर्थिक सशक्तिकरण और टिकाऊ खेती के दोहरे उद्देश्य को पूरा करने वाली इस पहल के कारण पुणे जिले में प्राकृतिक खेती का अभियान तेजी से विस्तार कर रहा है. प्राकृतिक खेती भारतीय परंपरा में निहित, पर्यावरण अनुकूल और रसायनमुक्त खेती की पद्धति है. यह पद्धति स्थानीय संसाधनों, पशुधन और कृषि पारिस्थितिकी पर आधारित है तथा बाहर से महंगी कृषि सामग्री खरीदने के बजाय खेत में उपलब्ध संसाधनों के उपयोग पर बल देती है. देशी गाय के गोबर और गोमूत्र से तैयार होने वाले बीजामृत, जीवामृत और घनजीवामृत, जैव आवरण, बहुफसली प्रणाली, हरी खाद, दशपर्णी अर्क और नीमास्त्र जैसी प्राकृतिक सामग्रियों के उपयोग से मिट्टी के स्वास्थ्य का संरक्षण किया जाता है तथा उत्पादन लागत में उल्लेखनीय बचत होती है. इस प्रणाली में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग से बचा जाता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है, ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम होता है और विषमुक्त खाद्य उत्पादन संभव होता है. राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत प्रत्येक 50 हेक्टेयर क्षेत्र का एक समूह बनाया जाता है. प्रत्येक समूह में लगभग 125 किसानों को शामिल किया जाता है तथा प्रत्येक लाभार्थी को एक एकड़ तक प्रोत्साहन दिया जाता है. योजना के अंतर्गत कृषि सखियों की नियुक्ति, किसानों का प्रशिक्षण, ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता, वित्तीय सहायता, खेतों का प्रमाणीकरण, अध्ययन सामग्री, फार्म डायरी, मोबाइल सहायता तथा निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. दो वर्षों की अवधि में प्रत्येक समूह के लिए लगभग 13.99 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. पुणे जिले में इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन जारी है और वर्ष 2025- 26 के लिए जिले को 54 समूह तथा 2,700 हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य प्राप्त हुआ है. इसके अनुसार मावल, मुलशी, हवेली, भोर, वेल्हा, आंबेगांव, जुन्नर और इंदापुर तहसीलों को प्रत्येक के लिए 3 समूह (150 हेक्टेयर), जबकि खेड़, शिरूर, बारामती, दौंड और पुरंदर तहसीलों को प्रत्येक के लिए 6 समूह (300 हेक्टेयर) स्वीकृत किए गए हैं. जिला प्रशासन, कृषि विभाग, ग्राम पंचायतों और कृषि सखियों के समन्वय से गांव-गांव में प्राकृतिक खेती के संबंध में जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. इच्छुक किसानों को प्रशिक्षण, खेत स्तर पर प्रदर्शन, प्राकृतिक कृषि सामग्री तैयार करने का मार्गदर्शन तथा तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है. लाभार्थी किसान अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, जिससे यह अभियान जनभागीदारी के माध्यम से और अधिक व्यापक होता जा रहा है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रसायनमुक्त, सुरक्षित और पोषणयुक्त खाद्य उत्पादन के कारण उपभोक्ताओं का वेिशास बढ़ रहा है तथा पर्यावरण अनुकूल खेती की मजबूत नींव तैयार हो रही है. राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों, प्राकृतिक खेती को दिए जा रहे प्रोत्साहन तथा राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के कारण पुणे जिले में टिकाऊ खेती का अभियान और अधिक मजबूत हो रहा है. उत्पादन लागत कम करना, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना, पर्यावरण का संरक्षण करना तथा नागरिकों को विषमुक्त खाद्य उपलब्ध कराना जैसे उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्राकृतिक खेती भविष्य का एक सक्षम और वेिशसनीय विकल्प बनकर उभर रही है. सरकार के मार्गदर्शन के साथ किसानों की बढ़ती भागीदारी ही इस परिवर्तन की वास्तविक यशोगाथा बन रही है. - संकलन : जिला सूचना कार्यालय, पुणे.
पुणे जिले में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन
तहसीलवार लक्ष्य (वर्ष 2025-26)
मावल - 3 समूह (150 हेक्टेयर)
मुलशी - 3 समूह (150 हेक्टेयर)
हवेली - 3 समूह (150 हेक्टेयर)
भोर - 3 समूह (150 हेक्टेयर)
वेल्हा - 3 समूह (150 हेक्टेयर)
खेड़ - 6 समूह (300 हेक्टेयर)
आंबेगांव - 3 समूह (150 हेक्टेयर)
जुन्नर - 3 समूह (150 हेक्टेयर)
शिरूर - 6 समूह (300 हेक्टेयर)
बारामती - 6 समूह (300 हेक्टेयर)
दौंड - 6 समूह (300 हेक्टेयर)
इंदापुर - 3 समूह (150 हेक्टेयर)
पुरंदर - 6 समूह (300 हेक्टेयर)
- कुल : 54 समूह.
2,700 हेक्टेयर क्षेत्र.