संभल में 100 कराेड़ के जमीन घाेटाले का पर्दाफाश

    01-Jul-2026
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यूपी के संभल में जिला प्रशासन ने 100 कराेड़ के जमीन घाेटाले का पर्दाफाश किया है. यूपी के संभल में बड़ा एक्शन लेते हुए मुरादाबाद स्टेट हाईवे पर तख्त गाेसाईं में स्थित 101 कराेड़ रुपये कीमत की 38 बीघा सरकारी जमीन काे भू-माफियाओं से मुक्त करा लिया गया है.बता दें कि 60 साल पहले नगरपालिका के फर्जी ‘पट्टे’ के जरिए भूमाफियाओं काे जमीन दे दी थी. उस समय अधिकारियाें द्वारा पाठगांव पर भारी फर्जीवाड़ा किया गया था. भूमाफिया जमीन पर कब्जा कर इसे बेच व व्यवसायिक इस्तेमाल कर रहे थे. मामला उजागर हाेने पर राज्य सरकार ने 38 बीघा जमीन मु्नत करायी. अब सरकारी दस्तावेज में रिकाॅर्ड दर्ज करने का काम जारी है. डीएम अंकित खंडेलवाल और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नाेई ने खुद राजस्व टीम के साथ माैके पर पहुंचकर पैमाइश कराई और जमीन पर ग्राम सभा का बाेर्ड लगवा दिया है.
 
डीएम अंकित खंडेलवाल ने कहा कि लगभग 101 कराेड़ रुपये की कीमत इस जमीन की है. यह जमीन करीब 60 साल से निजी कब्जे में थी. ज्यादातर जमीन खाली पड़ी थी जिस पर कब्जा लेकर बाेर्ड लगवा दिए गए थे. जितनी जमीन का व्यवसायिक उपयाेग किया जा रहा है उनके कब्जाधारकाें काे नाेटिस जारी कर खाली कराने के निर्देश दिए जाएंगे.डीएम और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नाेई ने रविवार काे माैके पर पहुंचकर मुआयना किया और कब्जा मुक्त किए जाने के निर्दे श दिए हैं. डीएम काे शिकायत मिली थी कि तहसील संभल के तख्त गुसाईं मेंसरकारी जमीन पर सईदुल रहमान और उनके वारिसाें का वर्षाें से कब्जा था. इस भूमि का अनुमानित मूल्य लगभग 101 कराेड़ रुपये है. डीएम ने इसका तत्काल संज्ञान लिया. उन्हाेंने उपसंचालक चकबंदी न्यायालय में पुनर्स्थापना अपील दायर करने का निर्देश दिया.
 
तीन जून 2026 काे यह अपील दायर की गई. उपसंचालक चकबंदी न्यायालय ने प्रतिदिन सुनवाई करते हुए 27 जून 2026 काे भूमि काे ग्राम सभा के नाम दर्ज करने का आदेश दिया गया. डीएम ने बताया कि इस आदेश के बाद ग्राम सभा काे यह भूमि पुनः प्राप्त हुई है. आदेश में गाटा संख्या 206, 207, 233, 242/378 और 279 सम्मिलित हैं. भूमि काे सरकारी अभिलेखाें में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं.शासन के 11 अगस्त 1954 के गजट केअनुसार, माैजा तख्त गुसाईं काे गैर आबाद घाेषित किया गया था. इसका प्रबंधन नगर पालिका संभल काे साैंपा गया था, हालांकि यह क्षेत्र उसकी सीमा से बाहर था. सईदुल रहमान ने दावा किया कि 1967 में तत्कालीन पालिका अध्यक्ष साहू चिरंजीलाल ने उन्हें इस भूमि का पट्टा दिया था. नगर पालिका अधिनियम 1916 के तहत बिना शासन की अनुमति के संपत्ति का अंतरण नहीं हाे सकता. इस मामले में शासन की काेई अनुमति उपलब्ध नहीं थी.अधिनियम के अनुसार, पट्टे की अवधि एक वर्ष से अधिक नहीं हाे सकती. कथित पट्टा दिनांक 12 जुलाई 1967 विधि शून्य पाया गया. डीएम ने बताया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय में नगर पालिका परिषद संभल बनाम सईदुल रहमान खां की एक रिट याचिका 2008 से विचाराधीन थी.