नई दिल्ली, 12 जुलाई (वि.प्र.) आपराधिक मामलाें में जमानत याचिकाओं का कड़ा विराेध करने, लेकिन मामलाें की सुनवाई समय पर पूरी करने के लिए आवश्यक कदम न उठाने पर सुप्रीम काेर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के प्रति नाराजगी व्यक्त की. काेर्ट ने कहा, महाराष्ट्र सरकार काे जनता के सामने बेनकाब कर देंगे.
जमानत याचिकाओं का कड़ा विराेध करने और मामलाें काे लटकाने के रवैए पर कड़ी फटकार लगाई. राज्य सरकार काे चेतावनी देते हुए कहा, सरकार का वकील जमानत देने का पूरी ताकत से विराेध करता है, जिससे आराेपी काे जमानत नहीं मिल पाती है. काेर्ट ने कहा, मुकदमाें की सुनवाई तेजी से करने सरकार काेई प्रभावी कदम नहीं उठाती, जमानत मिलना और शीघ्र सुनवाई करना आराेपी का माैलिक अधिकार है.
पीठ ने चेतावनी देते हुए कहा, महाराष्ट्र के इस तरह के मामले लगभग हर दिन हमारे सामने आते हैं. जब मामलाें की जांच की जाती है, ताे अक्सर सबूत भी कमजाेर पाए जाते हैं. यह स्थिति चिंताजनक है.
अपहरण और हत्या के मामले के एक आराेपी ने अदालत काे बताया कि वह पिछले चार साल से जेल में है. उसका मामला निचली अदालत में 86 बार सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ; लेकिन उसका दावा है कि उनमें से 53 बार उसे अदालत के सामने पेश ही नहीं किया गया.
इस पर सुप्रीम काेर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि आराेपी काे समय पर अदालत में पेश न करना राज्य सरकार की गंभीर गलती है. साथ ही, अदालत ने याद दिलाया कि त्वरित सुनवाई आराेपी का माैलिक अधिकार है. पीठ ने उल्लेख किया, चार साल में 34 गवाहाें में से केवल दाे गवाहाें की ही गवाही दर्ज की गई है. यह ल