सृजनात्मकता काे सम्मान देना शुरू करना हाेगा

    13-Jul-2026
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Osho
मैं एक गांव में ठहरा हुआ था, वहां किसी ने मुझे कहा कि हमारे गांव में एक परमहंस है. उन्हाेंने कहा, उनकी खूबी बड़ी अजीब है. वे जिस पत्तल में खाते हैं उसमें कुत्ते भी खाते हैं. यह उनकी खूबी है. मैं निकलता था रास्ते से ताे एक झाड़ के नीचे चल रहा था यह महाकार्य कि वे भी भाेजन कर रहे थे और कुत्ते भी भाेजन कर रहे थे. उनकाे देखकर ही मुझे लगा कि यह आदमी अपरिपक्व मालूम हाेता है. यह बुद्धि से विकसित नहीं मालूम हाेता. उसके मुंह से लार टपक रही थी.
 
उसके चेहरे ही से लग रहा था कि वह मंदबुद्धि है. ताे मैंने उनसे कहा कि भैया, कुत्ताें का आदर कराे, कि कुत्ते क्याें इसके साथ भाेजन कर रहे हैं ! ये कुत्ते परमहंस हैं. काेई ढंग का खानदानी कुत्ता हाे ताे इसके साथ भाेजन नहीं कर सकता. साफ इंकार कर देगा. ये कुत्ते आवारा हैं.
 
उन्हाेंने कहा, आप भी क्या करते हैं. अरे आपकाे मालूम नहीं है कि ये परमहंस... उनका बड़ा प्रताप है. वे दिन भर चाय पीते रहते थे और आधा कप ली लें, उसमें उनकी लार टपक रही है और वे किसी काे पकड़ा दें. वह प्रसाद.
 
जाे उसकाे पी ले वह श्रद्धावान ! निश्चित ही श्रद्धावान ही पी सकता है. और लाेग कहते हैं कि जिसने भी पी ली उनकी चाय, उसकाे लाभ ही लाभ है. ताे लाेग बैठे रहते उनके पास, पी जाते ! लाभ क्या है? काेई मुकदमा लड़ रहा है, काेई चुनाव लड़ रहा है. चुनाव लड़ने के वक्त नेतागण पहुंच जाते हैं कि अगर बाबा की चाय मिल जाये...! आदमी क्या-क्या करने काे राजी नहीं हाे जाता! और अब साै लाेग बाबा की चाय पीएंगे, उसमें से कुछ ताे मुकदमा जीतेंगे ही. न पीते ताे भी जीतते. आखिर काेई ताे मुकदमा जीतेगा. दाे आदमी लड़ेंगे ताे एक ताे जीतने ही वाला है. ताे पचास प्रतिशत ताे संयाेगवशात हाेने ही वाले हैं. जाे नहीं जीतेंगे, जाे नहीं चुनाव में जीतेंगे, उनकाे बाबा के भक्त समझाने वाले हाेते थे कि तुम्हारे पीने में पूरी श्रद्धा नहीं रही. और यह बात भी उनकाे जंचती, क्याेंकि श्रद्धा किसकाे पूरी हाे सकती है. आदमी किसी तरह गटक जाये, लार टपकती देख रहा है सामने, ताे भीतर ताे प्राण सकपका रहे हैं, संदेह उठ रहा है. ताे किसी तरह पी रहा है, क्याेंकि लाेभ में पड़ा है. जानता ताे है कि कि अगर अपना वश चले ताे इसी वक्त ेंक दूं. मगर मुकदमा जीतना है, चुनाव लड़ना है, ताे पीए ले रहा है.
 
ताे बाबा के भक्त कहते हैं कि तुमने श्रद्धा से नहीं पिया. और यह बात उनकाे माननी पड़ेगी कि श्रद्धा में कमी रह गई. और जाे जीत गया, उसने श्रद्धा से पिया. साे वह अपनी कमी खुद भी भूल जाता है, दूसरे भी भूल गये, जब जीत गये ताे जीत गये. अब क्या? सवाल ही नहीं उठाता .और जाे जीत गया वह खबरें ैलाता है, वह प्रचार करता है कि भई अद्भुत है, चमत्कार है. और जाे हार गया वह चुप रहता है, क्याेंकि इससे और अपनी बदनामी हाेगी कि श्रद्धा की कमी थी.
इस तरह इस दुनिया में बड़े खेल चलते हैं और इनकाे तुम सम्मान देते हाे.
सृजनात्मकता काे सम्मान दाे.