काम को टालने के बजाय उसकी जिम्मेदारी खुद ले

    13-Jul-2026
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ज्यादातर लाेग जिम्मेदारी का नाम सुनते ही उसे दाेष लगाने के अर्थ में लेते हैं. यानी यही अर्थ लगाते हैं कि गलती की जिम्मेदारी इन पर या उन पर हाेनी चाहिए. यह मिथ्या धारणा है. आपके जीवन में इस तरह की घटनाएं हुई हाें ताे उनके कई कारण हाे सकते हैं. उनके निर्माण में कई लाेगाें की साझेदारी हाे सकती है. लेकिन काैन जिम्मेदार? यह मेरा सवाल है; यह नहीं कि इसकी जड़ में काैन व्य्नित है. या किसकी गलती है? शंकरन पिल्लै शराब पीकर सड़क पर हल्ला मचाने लगा. पुलिस उसे अदालत ले गई. उसकी बकबक से न्यायाधीश खीज गए. उन्हाेंने कहा, तुम्हारा कसूर नहीं. तुमने जाे व्हिस्की पी रखी है, वहीं तुम्हें नचा रही है. यह सुनते ही शंकरन के आंसू भर आए और जज से बाेला- मान्यवर आपने जिस हद तक मुझे समझ लिया, मेरी पत्नी भी नहीं समझ पाई है. वह हमेशा मुझ पर इल्जाम लगाते हुए कहती है कि मेरी इस हालत के लिए मैं ही जिम्मेदार हूं.
 
इन्हीं की तरह कई लाेग अपनी जिम्मेदारी स्वीकार किए बिना, उसे टालने के बाद उबरने का मार्ग न जानकर परेशान हाेते हैं. जिम्मेदारी काे अंग्रेजी में रेस्पाॅन्सिबिलिटी कहते हैं.
 
रेस्पाॅन्सिबिलिटी-रेस्पाॅन्स+एबिलिटी यानी कि जिम्मेदारी का मतलब है आपकी उत्तर देने की क्षमता.
 
अपनी जिंदगी के प्रत्येक पल में आप इस विश्व की घटनाओं पर अपनी संवेदना व्य्नत करते रहते हैं. उसका उत्तर देते हैं. यहां उत्तर का मतलब है रेस्पाॅन्स.
 
आप जिस कमरे में रहते हैं, वह ठंडा है. आप चादर उठाकर ओढ़ लेते हैं. यह है उस ठंडी हवा के लिए आपका दिया उत्तर. आप जाे सांस लेते हैं,वह पेड़ के द्वारा बाहर निकाली गई हवा है. आप और पेड़ हरदम एक-दूसरे काे उत्तर देते हुए ही ताे जी रहे हैं.हर परिस्थिति में जब आप महसूस करते हैं कि मैं जिम्मेदार हूं, तब उस परिस्थिति का उत्तर देने की क्षमता आपके अंदर माैजूद रहती है. अगर आप मैं जिम्मेदार नहीं हूं, कहते हुए टाल दें ताे उत्तर देने की क्षमता आपके अंदर नहीं रह जाती. जीवन में परिस्थितियां सुविधा और असुविधाजनक या अनुकूल-प्रतिकूल हाे सकती हैं. जैसी भी परिस्थिति हाे, उसका सामना करें.
 
यदि आप कहते हैं कि हर तरह की परिस्थिति में उसका उत्तर देने की इच्छा है ताे आपके अंदर उसके लिए मैं ही जिम्मेदार हूं, इस बाेध के हाेने पर उत्तर देना संभव हाेगा. जिम्मेदारी का एहसास हाेने पर श्नितशाली और टालने की काेशिश करते समय निकम्मे बन जाते हैं. मैं जिम्मेदार हूं, यह मानेंगे ताे जिंदगी आपके हाथ में है. दूसराें काे दाेष देने पर अपनी जिंदगी का अपहरण करने की अनुमति उसे दे देते हैं. जाे कुछ भी हाे, मेरे जीवन की घटनाओं के लिए मैं ही जिम्मेदार हूं, हृदय में यह अनुभव करेंगे ताे आपके जीवन में प्रेम और आनंद का साम्राज्य छा जाएगा. यही उन्नति का आधार है.
 
- सूत्र दुख न पालें इस दुनिया में जीवन-यापन के लिए कुछेक कामाें काे करना ही पड़ता है. उन सबकाे तुच्छ समझने से ही पैदा हाेती हैं झंझटें. अपनी पसंद का काम जाे भी हाे, पूरे मन के साथ उसे निभाइए, तब भगवान के समीप हाेने का एहसास पाएंगे. दूसरे किसी की तरह जीने का संकल्प करके दुखाें काे पालना छाेड़ दीजिए.