चांद और मछलियाें के बीच अद्भुत तालमेल

सागर की बहुत-सी मछलियाें का अध्ययन किया गया है. ऐसी मछलियां हैं, जाे जब सागर उतार पर हाेता है, जब सागर उतरता है, तभी सागर के तट पर आकर अंडे रख जाती हैं. सागर उतर रहा है वापस. मछलियां रेत पर आएंगी, सागर की लहराें पर सवार हाेकर, अंडे देंगी, सागर की लहराें पर वापस लाैट जाएंगी. पंद्रह दिन में िफर सागर की लहरें िफर उस जगह आएंगी तब तक अंडे ूटकर उनके चूजे बाहर आ गए हाेंगे. आनेवाली लहरें वापस उन चूजाें काे सागर में ले जाएंगी.

    14-Jul-2026
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सागर की बहुत-सी मछलियाें का अध्ययन किया गया है. ऐसी मछलियां हैं, जाे जब सागर उतार पर हाेता है, जब सागर उतरता है, तभी सागर के तट पर आकर अंडे रख जाती हैं. सागर उतर रहा है वापस. मछलियां रेत पर आएंगी, सागर की लहराें पर सवार हाेकर, अंडे देंगी, सागर की लहराें पर वापस लाैट जाएंगी. पंद्रह दिन में िफर सागर की लहरें िफर उस जगह आएंगी तब तक अंडे ूटकर उनके चूजे बाहर आ गए हाेंगे. आनेवाली लहरें वापस उन चूजाें काे सागर में ले जाएंगी.
 
जिन वैज्ञानिकाें ने इन मछलियाें का अध्ययन किया है वे बड़े हैरान हुए हैं.
 
क्याेंकि मछलियां सदा ही उस समय अंडे देने आती हैं जब सागर का तूान उतर रहा हाेता है. अगर वह चढ़ते तूान में अंडे दे दें ताे अंडे ताे तूान में बह जाएंगे. वह अंडे तभी देती हैं जब तूान उतरता रहता है, एक-एक कदम सागर की लहरें पीछे हटती जाती हैं. वह जहां अंडे देती हैं वहां लहरें दाेबारा नहीं आतीं िफर, नहीं ताे लहरें अंडे बहा ले जाएंगी.
 
वैज्ञानिक बहुत परेशान रहे हैं कि इन मछलियाें काे कैसे पता चलता है कि सागर अब उतरेगा? सागर के उतरने की घड़ी आ गई, क्याेंकि जरा-सी भी भूल-चूक समय की और अंडे ताे सब बह जाएंगे! और उन्हाेंने भूल-चूक कभी नहीं की लाखाें साल में, नहीं ताे वे खत्म हाे गई हाेतीं. उन्हाेंने कभी भूल की ही नहीं, पर इन मछलियाें के पास क्या उपाय है जिनसे ये जान जाती हैं? इनके पास काैन-सी इन्द्रीय है जाे इनकाे बताती है कि अब सागर उतरेगा? लाखाें मछलियां एक क्षण के लिए किनारे पर इकट्ठी हाे जाएंगी. इनके पास जरूर काेई संकेत-लिपि, इनके पास काेई सूचना का यंत्र हाेना ही चाहिए.
 
कराेड़ाें मछलियां दूर-दूर हजाराें मील सागर तल पर इकट्ठे हाेकर अंडे रख जाएंगी एक खास घड़ी में. जाे अध्ययन करते हैं, वे कहते हैं कि चांद के अतिरिक्त और काेई उपाय नहीं है. चांद से ही इनकाे संवेदनाएं मिलती हैं. इन मछलियाें काे उन संवेदनाओं से पता चलता है कि कब उतार पर, कब चढ़ाव पर...? चांद से जाे उन्हें धक्के मिलते हैं उन्हीं धक्काें के अतिरिक्त और काेई रास्ता नहीं है कि उनकाे पता चल जाए.
 
कुछ का ख्याल था कि सागर की लहराें से कुछ पता चलता हाेगा. ताे वैज्ञानिक ने इन मछलियाें काे ऐसी जगह रखा जहां सागर की लहर ही नहीं है.
 
झील पर रखा, अंधेरे कमराें पर पानी में रखा. लेकिन बड़ी हैरानी की बात है.
 
अंधेरे में बंद है मछलियां, उनकाे चांद का काेई पता नहीं, आकाश का काेई पता नहीं, पर जब चांद ठीक जगह पर आया, तब समुद्र की मछलियां जाकर तट पर अंडे देने लगीं- तब उन मछलियाें ने पानी में ही अंडे दे दिए. क्याेंकि काेई तट नहीं, काेई किनारा नहीं- तब ताे लहराें का काेई सवाल न रहा.
 
अगर काेई कहता हाे कि दूसरी मछलियाें काे देखकर यह दाैड़ पैदा हाे जाती हाेगी, ताे वह भी सवाल न रहा. अकेली मछलियाें काे रखकर भी देखा. इनके दिमाग काे सब तरह से गड़बड़ करने की काेशिश की- फिर भी ठीक चांद जब अपनी जगह पर आया तब मछलियाें ने अंडे दे दिये. जहां भी थीं, वहीं उन्हाेंने अंडे दे दिये.