नई दिल्ली, 13 जुलाई (वि.प्र./वार्ता) भारत में दस साल में महंगाई ने रिकाॅर्ड ताेड दिए हैं. इतनी ज्यादा महंगाई से लाेग परेशान हाे गए हैं. पाम ऑयल 116%, सूरजमुखी 98%, प्याज 96% तथा चावल के दामाें में 61 प्रतिशत तक की बढ़ाेतरी हुई है. तेल से एलपीजी तक की कीमतें आसमान छू रही हैं, घरेलू वस्तुओं के बढ़ते दामाें के कारण गृहणियाें का बजट गड़बड़ा गया है.
सरकार के दावे खाेखले साबित हुए हैं. उपभाे्नता मामले की रिपाेर्ट के आंकड़े कड़वी सच्चाई उजागर कर रहे हैं. देश में आम आदमी की जेब पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ी है. साेमवार काे जारी सरकारी आंकड़ाें के मुताबिक, जून महीने में खुदरा महंगाई दर में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है.
मई में 3.93 फीसदी पर रहने वाली खुदरा महंगाई दर जून में उछलकर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई है. इस तेजी ने आम उपभाेक्ताओं के घरेलू बजट काे बिगाड़ दिया है. जून महीने में रिटेल (खुदरा) महंगाई दर बढ़ने का सबसे मुख्य कारण खाद्य पदार्थाें की कीमताें में आई भारी तेजी है.
सरकारी आंकड़ाें के अनुसार, उपभाेक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य महंगाई दर जून में बढ़कर 5.32 फीसदी पर पहुंच गई, जाे इससे पिछले महीने यानी मई में 4.78 फीसदी के स्तर पर थी. खाने-पीने की जरूरी चीजाें के लगातार महंगे हाेने से यह संकट खड़ा हुआ है.
खुदरा महंगाई बढ़ने का सीधा और साफ असर आम आदमी की राेजमर्रा की जिंदगी पर देखने काे मिलेगा. खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से रसाेई का मासिक बजट प्रभावित हाेगा.
बाजार में दालें, हरी सब्जियां और अन्य आवश्यक खाद्य सामग्रियां महंगी हाेने की संभावना है, जिससे लाेगाें के घरेलू खर्चाें में बढ़ाेतरी हाेगी और उपभाेक्ताओं काे अपनी खरीदारी की आदताें में कटाैती या बदलाव करना पड़ सकता है.