फेमकेयर फर्टिलिटी द्वारा दंपति को मिला जुड़वां बच्चों का सुख

10 साल का उम्मीद भरा इंतजार खुशी में बदला; उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था जैसी कई चुनौतियां थीं

    15-Jul-2026
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शिवाजीनगर, 14 जुलाई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

लगभग दस वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार ‌‘फेमकेअर फर्टिलिटी में एक दंपति का माता-पिता बनने का बरसों पुराना सपना सच हो गया है. बांझपन (बंध्यत्व), जननांगों का क्षयरोग (टीबी), जटिल उपचार और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था जैसी कई गंभीर चुनौतियों के कारण उनका यह सफर बेहद मुश्किलों भरा रहा था. आखिरकार, एक स्वस्थ बेटी और एक स्वस्थ बेटे के जन्म के साथ इस चुनौतीपूर्ण यात्रा का अंतिम पड़ाव बेहद सुखद और आनंदमयी हुआ है.यह दंपत्ति पिछले दस सालों से बंध्यत्व से जूझ रहा था. कई दिक्कतों के बावजूद उन्होंने माता-पिता बनने की उम्मीद नहीं छोड़ी थी. आखिरकार उन्होंने फेमकेयर फर्टिलिटी की मेडिकल डायरेक्टर और वंध्यत्व विशेषज्ञ डॉ. पल्लवी टिपले से इलाज के लिए संपर्क किया. शुरुआती जांच के दौरान सोनोग्राफी में हाइड्रोसैलपिक्स पाया गया. इसके साथ ही गर्भाशय की अंदरूनी परत, यानी एंडोमेट्रियम, का पर्याप्त रूप से विकसित न होना भी सामने आया. डायग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी जांच में जेनिटल ट्यूबरकुलोसिस का निदान हुआ. इन जांच के निष्कर्षों के अनुसार डॉ. पल्लवी ने चरणबद्ध तरीके से और मरीज की जरूरत के हिसाब से एक व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार की. इसके अनुसार दंपति ने फेमकेअर फर्टिलिटी में आईवीएफ उपचार शुरू किया. इस दौरान विभिन्न उपचारों के बाद भ्रूण प्रत्यारोपण (एम्ब्रियो ट्रांसफर) सफल रहा और गर्भधारणा की जांच पॉजिटिव आई. आईवीएफ उपचार के बाद जुड़वां गर्भधारण और पिछले पेल्विक इन्फेक्शन के इतिहास के कारण यह गर्भावस्था अत्यधिक जोखिम वाली थी. पूरी गर्भावस्था के दौरान डॉ. पल्लवी और मेडिकल टीम ने मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे दोनों बच्चों की नियमित और बारीकी से निगरानी की. बेहद सावधानीपूर्वक की गई सर्जरी के कारण मरीज का गर्भाशय सुरक्षित रखा जा सका और डिलीवरी भी सफल रही. 
 
व्यक्तिगत उपचार योजना आवश्यक
इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. पल्लवी टिपले ने कहा कि, बंध्यत्व के उपचार का मतलब केवल आईवीएफ तकनीक नहीं है. सही निदान, मूल बीमारियों का समय पर इलाज, भ्रूण प्रत्यारोपण से पहले गर्भाशय की सही तैयारी और पूरी गर्भावस्था के दौरान लगातार निगरानी रखना, ये घटक भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं. मरीज के अनुसार व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करना आवश्यक होता है.