
पुणे, 14 जुलाई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) डेक्कन कॉलेज अभिमत विश्वविद्यालय ने ‘भारत-विद्या’ पाठ्यक्रम की घोषणा की और राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा देने के लिए विजन 2047 योजना पर अब अपना लक्ष्य केंद्रित किया है. यह जानकारी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.भूषण पटवर्धन ने मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में दी. उन्होंने कहा कि, भारत-विद्या यह पांच वर्षीय एकीकृत डिग्री-स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम बनाया गया है. इस पाठ्यक्रम को भारतीय ज्ञान प्रणालियों और पश्चिमी ज्ञान प्रणालियों को एकीकृत करके डिजाइन किया गया है. नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के अनुसार, इस कोर्स में तीन एग्जिट ऑप्शन मिलेंगे 120 क्रेडिट अंडरग्रेजुएट डिग्री, 160 क्रेडिट डिग्री (ऑनर्स), और 200 क्रेडिट पोस्टग्रेजुएट डिग्री के लिए है. पहले दो सालों में, स्टूडेंट्स को सिविलाइजेशन स्टडीज, फिलॉसफी, क्लासिकल लैंग्वेज ट्रेडिशन, एनवायरनमेंट, एडमिनिस्ट्रेशन, एथिक्स, साइंस और आर्ट्स पर मार्गदर्शन दिया जाएगा. पपेशलाइजेशन और स्किल-बेस्ड एजुकेशन तीसरे साल से शुरू होगी. आखिरी दो साल पपेशलाइअड सब्जेक्ट्स में बेसिक रिसर्च के लिए रिजर्व होंगे, जबकि पांचवां साल पूरी तरह से रिसर्च और इंटर्नशिप के लिए समर्पित होगा. भारत-विद्या के तहत पढ़ाई के लिए आर्कियोलॉजी और हेरिटेज साइंसेज, प्राचीन भारतीय इतिहास और संस्कृति, संस्कृत,लिंग्विस्टिक्स, मंदिर आर्किटेक्चर, आइकनोग्राफी और हेरिटेज मैनेजमेंट ये पांच स्ट्रीम उपलब्ध होंगे. पाठ्यक्रम के लिए 12वीं पास होना जशरी है. एडमिशन प्रोसेस अगले हरते से शुरू होगा. पूरी जानकारी इंस्टीट्यूट की वेबसाइट पर दी जाएगी. अलायंस ऑफ भारतीय एकेडेमिया फॉर ट्रांसडिसिप्लिनरी एजुकेशन यानी ‘आभा महाराष्ट्र’ इस पहल का नेतृत्व डेक्कन कॉलेज करेगा. मुंबई, पुणे के साथ ही छत्रपति डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा वेिशविद्यालय (छ.संभाजीनगर), नागपुर और एस.एन. डी.टी. महिला वेिशविद्यालय को संस्थापक भागीदार के रूप में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा. शैक्षणिक पहलुओं के लिए, 10 करोड़ के शुरुआती अनुदान और कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में एमएसएफडीए की मान्यता का प्रस्ताव महाराष्ट्र सरकार को प्रस्तुत किया गया है. साथ ही डेक्कन कॉलेज के लिए विजन 2047 तैयार किया जा रहा है. विजन 2047 प्लान के जरिए ह्यूमैनिटीज, ह्यूमन साइंसेज और हेरिटेज स्टडीज के फील्ड में डेक्कन कॉलेज को इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल इंपोर्टेंस के तौर पर मान्यता देने के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट को एक रपोजल भेजा जाएगा.