
पुणे, 14 जुलाई (आ.प्र.)
सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ एजुकेशन, डिपार्टमेंट और डिपार्टमेंट ऑफ जेंडर स्टडीज और महाराष्ट्र सरकार के सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘ट्रांसजेंडर पहचान और मुद्दे: जन-जागरूकता’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का 11 और 12 जुलाई को यूनिवर्सिटी में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया. सेमिनार में ट्रांसजेंडर समुदाय की पहचान, समावेशी शिक्षा, सामाजिक- सांस्कृतिक चुनौतियों, कानूनी अधिकारों, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तथा समानता आधारित समाज के निर्माण हेतु आवश्यक नीतियों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत विचार-विमर्श किया. वक्ताओं ने ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने, सम्मानजनक व्यवहार, समान अवसर और संस्थागत सहयोग को समय की आवश्यकता बताया. समापन समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठावले थे, जबकि महाराष्ट्र सरकार की सामाजिक न्याय राज्य मंत्री माधुरी मिसाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं. ‘अलायंस इंडिया’ के ‘प्रोजेक्ट साहस’ की एडवोकेसी एवं ट्रेनिंग ऑफिसर सिमरन अरोड़ा ने मुख्य वक्तव्य देते हुए ट्रांसजेंडर समुदाय के सशक्तिकरण और सामाजिक स्वीकार्यता पर जोर दिया. यूनिवर्सिटी के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. पराग कालकर ने अतिथियों का स्वागत किया. ‘नेशनल काउंसिल फॉर ट्रांसजेंडर पर्सन्स’ (एनसीटीपी) की विशेषज्ञ सदस्य एवं यूनिवर्सिटी सीनेट सदस्य डॉ. अपर्णा लालिंगकर ने सेमिनार की रूपरेखा प्रस्तुत की. सेमिनार की समन्वयक एवं शिक्षा एवं विस्तार विभाग की प्रमुख प्रो. डॉ. गीता शिंदे ने अतिथियों का परिचय कराया, जबकि स्कूल ऑफ एजुकेशन के निदेशक प्रो. डॉ. विलास आढाव ने आभार व्यक्त किया. प्रबंधन परिषद सदस्य रवींद्र सिंगनापुरकर, बागेश्री मंठालकर, सीनेट सदस्य प्रसेनजीत फड़णवीस, कृष्णा भंडालकर, शांतनु लमदाड़े, डॉ. विजय खरे, पुणे मनपा के उपमहापौर परशुराम वाड़ेकर, संजय सोनावणे तथा शैलेन्द्र चव्हाण सहित अनेक शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता और विद्यार्थी उपस्थित रहे.