मोडी लिपि समृद्ध भाषा व संस्कृति की परिचायक : डॉ. राजेश शाह

    15-Jul-2026
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बुधवार पेठ, 14 जुलाई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

भारतीय संस्कृति में मौखिक परंपरा का बहुत महत्व था. समय के साथ संवाद और उसी क्रम में लिपियों का विकास हुआ. भारतीय भाषाओं के उद्गम और सफर को देखें तो, मोडी लिपि एक समृद्ध भाषा संस्कृति की परिचायक है, ऐसा प्रतिपादन दि पूना गुजराती केलवणी मंडल के चेयरमैन डॉ. राजेश शाह ने किया. वे एच. वी. देसाई कॉलेज में शुरू किए गए मोडी लिपि प्रशिक्षण केंद्र के इस वर्ष के सत्र (वर्ग) के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे. इस कार्यक्रम में पिछले वर्ष के सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए. इस अवसर पर दि पूना गुजराती केलवणी मंडल के पदाधिकारी दिलीपभाई जगड, विनोदकुमार ढेढिया, प्रमोदभाई शहा उपस्थित थे. बताया गया कि इस प्रशिक्षण केंद्र को शुरू करने में लोकमान्य मल्टीपर्पज को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड का सहयोग मिला है. कार्यक्रम की प्रस्तावना प्राचार्य डॉ. राजेंद्र गुरव ने की, जबकि मंच संचालन इतिहास विभाग के प्रमुख प्रा. डॉ. गणेश राउत ने किया.