श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के काेषाध्यक्ष ने पत्रकार-वार्ता में दी जानकारी'
पुणे, 14 जुलाई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क).
अयाेध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के काेषाध्यक्ष पद से मैं इस्तीफा नहीं दूँगा.
मेरे इस्तीफा देने के बारे में गलत खबरें फैलाई जा रही हैं. हम मैदान छाेड़कर भागेंगे नहीं. यह स्पष्टीकरण अयाेध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के काेषाध्यक्ष स्वामी गाेविंददेव गिरी ने मंगलवार काे पुणे यूनिवर्सिटी राेड स्थित उनके निवास ‘धर्मश्री’ में आयाेजित पत्रकार वार्ता में दिया.उन्हाेंने कहा कि यदि एसआईटी की रिपाेर्ट में काेषाध्यक्ष पद पर मुझ पर काेई दाेषाराेपण किया जाता है, ताे मैं इस्तीफा देने पर विचार करूँगा. लेकिन एसआईटी न्यायालय नहीं है.
एसआईटी का शब्द ब्रह्मवाक्य नहीं हाेता, क्याेंकि एसआईटी केवल एक जांच समिति है.पुणे में पत्रकार वार्ता में स्वामी गाेविंददेव गिरी ने कहा कि हर तरफ बेबुनियाद तरीके से यह खबर फैलाई जा रही थी कि काेषाध्यक्ष इस्तीफा देंगे या इस्तीफा देने के बारे में साेच रहे हैं. उन्हाेंने मन बना लिया है. ऐसा कहने का काेई भी आधार नहीं है. मैंने ऐसा कभी नहीं कहा. मैंने कभी ऐसा व्यक्त (जाहिर) नहीं किया. मैं कभी ऐसा विचार सामने रखूँगा भी नहीं, क्याेंकि मैं छत्रपति शिवाजी महाराज का अनुयायी हूँ. मैदान छाेड़कर भागेंगे नहीं. हम इस सारी समस्या काे सुलझाकर रहेंगे.
स्वामी गाेविंददेव गिरी ने कहा कि मुझे आपकाे यह बताना है कि पुणे में मैंने पत्रकाराें काे इस स्थान पर बुलाने का कारण यह है कि यह हमारा ‘धर्मश्री’ निवास है और मैं यहाँ 1993 से रह रहा हूँ. यह एक अपार्टमेंट है. इसमें 10 फ्लैट हैं. इन 10 फ्लैटाें में से एक फ्लैट में मैं रहता हूँ, तीन फ्लैटाें में हमारे अलग-अलग ट्रस्टाें के कार्यालय हैं और एक फ्लैट में रसाेईघर है.
(पेज 1 से आगे) अपार्टमेंट के 10 फ्लैटाें में से पाँच हमारी संस्थाओं के हैं. इसमें से कुछ भी मेरे नाम पर नहीं है. मेरे नाम पर पूरे जीवन में एक ईंट भी नहीं है. इसे अच्छी तरह से नाेट कर लीजिए. केवल एक बैंक खाता मेरे नाम पर है. इसके अलावा मेरे नाम पर काेई भी संपत्ति नहीं है और कभी थी भी नहीं. इसलिए आप सभी इस बात काे समझ सकें, इसके लिए मैंने आपकाे हमारे इस सीधे-सादे ‘धर्मश्री’ के प्रांगण में बुलाया.
स्वामी गाेविंददेव गिरी ने कहा कि अयाेध्या ट्रस्ट में जाे गड़बड़ियाें अर्थात अनियमितताओं की जांच हाे रही है, उससे मैं संतुष्ट हूँ. एसआईटी जिस तरह से जांच कर रही है, उससे मैं संतुष्ट हूँ. अब ताे यह मामला उच्चतम न्यायालय में पहुँच जाने के कारण मैं और भी अधिक संतुष्ट हूँ.
उन्हाेंने कहा कि चंपत राय ने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है. न्यास के संविधान में इस प्रकार का प्रावधान है कि इस्तीफा देने के बाद उसे स्वीकार करने की आवश्यकता नहीं हाेती. जैसे ही इस्तीफा दिया जाता है, वह स्वतः स्वीकार माना जाता है.
उन्हाेंने कहा कि यह भी नहीं कहा जा सकता कि चढ़ावे की चाेरी का पूरा ठीकरा चंपत राय के सिर फाेड़ा गया है, क्याेंकि उनकी लापरवाही के कारण वे इस पूरे मामले के लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं. यह बात उनके भी ध्यान में आई, इसलिए उन्हाेंने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया. उनका इस्तीफा किसी भी दबाव में नहीं लिया गया.
स्वामी गाेविंददेव गिरी ने कहा कि काेषाध्यक्ष के रूप में मेरी जिम्मेदारी निश्चित रूप से है. इसे जरा समझिए.
काेष में आए समस्त धन का आय-व्यय, लेखा-जाेखा और उस पर नियंत्रण रखना मेरा काम है. यह कार्य सुचारु रूप से चलता रहे, इसके लिए हमारे कार्यालय से तीन चार्टर्ड अकाउंटेंट हर महीने पाँच दिनाें के लिए वहाँ जाते हैं और सभी अभिलेखाें की जांच करते हैं. दानपात्र में चढ़ावा आना एक दैनिक प्रक्रिया है.
उसकी गिनती करना भी प्रतिदिन का कार्य है. वहाँ के स्थानीय न्यासी यह कार्य देखते थे, क्याेंकि मैं लगातार यात्रा पर रहता हूँ