नेता तभी तक नेता है जब तक और लाेगाें काे नेता हाेने का खयाल पैदा नहीं हुआ है. जब तक अनुयायी हाेने काे राजी हैं, तब तक नेता, नेता है. जिस दिन अनुयायियाें ने भी घाेषणा कर दी कि हम भी नेता हाे गए, उस दिन नेता खाे जायेगा. अमीर तभी तक अमीर है, जब तक गरीब है. और तुम्हारे पास बड़ा महल तभी तक हाे सकता है जब तक और लाेगाें के पास छाेटे झाेपड़े हैं. ताे जैसे बड़े महलवाला आदमी न चाहेगा कि सभी के पास बड़े महल हाे जायें... यह ताे साफ समझ में आता है, अर्थशास्त्र का सीधा नियम है, कि अमीर का मजा उसकी अमीरी में तभी तक है जब तक और लाेग गरीब हैं.
तुम्हारे पास एक शानदार कार है, ताे उसका मजा तभी तक है जब तक दूसरे लाेगाें पर, राह चलते लाेगाें पर बरसात में तुम कीचड़ उछलते हुए कार से निकल जाते हाे. अगर सभी के पास वैसी गाड़ियां हैं, बात खतम् हाे गयी! तुम्हारा सारा मजा इस कार का चला जायेगा. इस कार का मजा कार में न था; दूसराें के पास कार नहीं है, उसमें था. जीवन का जाल बड़ा जटिल है! मेरे एक मित्र है कलकत्ते में. मैं उनके घर में कभी-कभी रूकता था. वाे बिलकुल पागल थे अपने मकान के लिए.
उन्हाेंने शानदार मकान बनाया था. कलकत्ता में उसकी काेई तुलना न थी. उन्हाेंने पूरे कलकत्ते काे मात कर दिया था. चाैबीस घंटे वाे मकान के ही खयाल से भरे रहते थे...
ताे जब भी मैं उनके घर जाता ताे मकान...
यह दिखाते, वाे दिखाते! नया स्विमिंग पूल बना डाला. क्या-क्या उन्हाेंने कर डाला है, वाे दिखाते. एक बार जब मैं गया ताे उन्हाेंने मकान की काेई बात न की. और मैं ताे पहले से ही तैयार हाेके आया था कि वाे मकान की बात सुननी पड़ेगी. वाे कुछ बाेले ही नहीं मकान पर और कुछ बड़े उदास दिखे, उत्साह भी कुछ ढीला मालूम पड़ा, कुछ सुस्त से मालूम पड़े. सांझ हाेते-हाेते मैंने पूछा, ‘मामला क्या है? मकान का क्या हुआ?’ उन्हाेंने कहा, ‘बात ही मत उठाओ!’ मैंने कहा, ‘कुछ ताे बात हाेगी.
तुम उदास भी हाे. वाे सदा की प्रुल्लता, मकान की चर्चा, कुछ नया किया, कुछ नया बनाया-वाे सब हुआ क्या’ वाे मुझे हाथ पकड़के बाहर लाए पड़ाेस में, कहा कि वाे देखाे! एक आदमी ने उनसे बड़ा मकान बना लिया! वाे बाेले, जब तक इसकाे मात न कर दूं, तब तक अब क्या बात करना! मन बड़ा दुखी रहने लगा. अभी सुविधा भी नहीं है कि इतना ऊंचा उठा लूं. मात हाे गया हूं! मैंने कहा कि तुम्हारा मकान वैसा ही का वैसा है. इस पे किसी ने छुआ भी नहीं है. कुछ घटा नहीं, कुछ बिगड़ा नहीं; सब सुंदर है. लेकिन पास के आकाश में एक नया मकान खड़ा हाे गया! किसी ने तुम्हारी लकीर के पास बड़ी लकीर खींच दी-तुम्हारी लकीर काे छुआ भी नहीं है, तुम अचानक छाेटे हाे गये! ताे मैंने उनसे कहा, अब तुम यह ताे साेचाे, ताे यह मजा तुम जाे अपने मकान में ले रहे थे, अपने मकान का मजा न था; वाे जाे झाेपड़े पास में थे, उनका मजा था. ताे तुम्हारी अमीरी किसी के गरीब हाेने में निर्भर है.