घुटनों का दर्द अब केवल बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गया है. बदलती जीवनशैली, मोटापा, लंबे समय तक बैठकर काम करना, खेल के दौरान चोट और शुरुआती ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी स्थितियों के कारण 35-40 वर्ष की उम्र के लोगों में भी यह परेशानी तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों ने उपचार के नए विकल्प उपलब्ध कराए हैं. इन्हीं में से एक है रीजनरेटिव थेरेपी, जिसमें शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता का उपयोग कर क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत करने का प्रयास किया जाता है. रीजनरेटिव थेरपी और PRP (प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा) उपचार को लेकर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं. इस बारे में प्रसिद्ध दर्द निवारण विशेषज्ञ डॉ. प्रिया राठी ने दै. आज का आनंद से बातचीत की. प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश
प्रश्न : रीजनरेटिव थेरेपी क्या है?
डॉ.राठी- रीजनरेटिव थेरपी घुटने के दर्द के उपचार का एक आधुनिक विकल्प है. इसमें शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता का उपयोग करके घिसे हुए या क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत करने का प्रयास किया जाता है. इस उपचार में PRP (प्लेटलेट रिच प्लाज्मा) जैसे इंजेक्शन का उपयोग किया जाता है.
प्रश्न : PRP थेरेपी कैसे काम करती है?
डॉ.राठी- इस प्रक्रिया में मरीज के अपने खून से प्लेटलेट्स को अलग किया जाता है और फिर उन्हें घुटने के प्रभावित जोड़ में इंजेक्ट किया जाता है. प्लेटलेट्स में मौजूद ग्रोथ फैक्टर्स सूजन कम करने और ऊतकों की मरम्मत में सहायता करते हैं.
प्रश्न : यह प्रक्रिया कैसे की जाती है?
डॉ.राठी- सबसे पहले मरीज के हाथ से थोड़ी मात्रा में खून लिया जाता है. इसके बाद उसे सेंट्रीफ्यूज मशीन में प्रोसेस करके प्लेटलेट्स को अलग किया जाता है. तैयार PRP को अल्ट्रासाउंड गाइडेंस की सहायता से घुटने के सही स्थान पर इंजेक्ट किया जाता है. यह पूरी प्रक्रिया OPD में लगभग 30 से 45 मिनट में पूरी हो जाती है और मरीज उसी दिन घर जा सकता है.
प्रश्न : कितने सेशन की आवश्यकता होती है?
डॉ.राठी- सामान्यतः 3 से 4 सप्ताह के अंतराल पर 1 से 3 सेशन की आवश्यकता पड़ सकती है. हालांकि, सेशन की संख्या मरीज की बीमारी की गंभीरता, जांच रिपोर्ट और चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर तय की जाती है.
प्रश्न : यह उपचार किन मरीजों के लिए उपयुक्त हो सकता है?
डॉ.राठी-रीजनरेटिव थेरेपी घुटने के दर्द के उपचार के विकल्पों में से एक है. शुरुआती स्तर के ऑस्टियोआर्थराइटिस, हल्की चोट या कुछ विशेष स्थितियों वाले मरीजों में यह लाभदायक हो सकती है. लेकिन यह हर मरीज के लिए उपयुक्त हो, ऐसा जरूरी नहीं है. विस्तृत जांच के बाद ही सही उपचार का निर्णय लिया जाता है.
प्रश्न : क्या यह प्रक्रिया सुरक्षित है?
डॉ.राठी- चूंकि इसमें मरीज के अपने शरीर से प्राप्त तत्वों का उपयोग किया जाता है, इसलिए संक्रमण या एलर्जी का जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है. फिर भी हर मरीज की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है, इसलिए उपचार से पहले विशेषज्ञ से परामर्श आवश्यक है.
प्रश्न : इलाज शुरू करने से पहले मरीजों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
डॉ.राठी- घुटनों के दर्द के कई कारण हो सकते हैं और उसी के अनुसार उपचार भी अलग-अलग होता है. एक्स-रे, एमआरआई और अन्य आवश्यक जांच के आधार पर दर्द विशेषज्ञ यह तय करते हैं कि मरीज के लिए कौन-सा उपचार सबसे उपयुक्त रहेगा. रीजनरेटिव थेरेपी भी उन्हीं विकल्पों में से एक है.