साेसायटियाें के विराेध से पुनावले कचरा डिपाे का आरक्षण बदला पुनावले में वन विभाग की भूमि पर कचरा डिपाे बनाने का वहां के हाउसिंग साेसायटीधारकाें ने विराेध किया. उसे सर्वदलीय नगरसेवकाें और जनप्रतिनिधियाें ने भी समर्थन दिया. उस दबाव के आगे झुकते हुए मनपा के डीपी (डेवलपमेंट प्लान) से वह आरक्षण हटा दिया गया है. ऐसा हाेने के बावजूद, शहर में किसी अन्य स्थान पर कचरा डिपाे के लिए आरक्षण नहीं रखा गया है. इसलिए माेशी कचरा डिपाे का काेई अन्य विकल्प उपलब्ध नहीं हाे सका है.
पिंपरी, 20 जुलाई (आ.प्र.) कचरा भले ही हमारा हाे, लेकिन दुर्गंध और अस्वच्छता फैलने के कारण हमें अपने घर या हाउसिंग साेसायटी के पास कचरा प्राेसेसिंग केंद्र नहीं चाहिए, ऐसा अड़ियल रुख अपनाकर कई हाउसिंग साेसायटियाें और निवासियाें ने विराेध किया है. शहर के इस पुराने कड़वे अनुभव काे देखते हुए, आयुक्त द्वारा घाेषित किए गए 10 कचरा प्राेसेसिंग केंद्राें का भी भारी विराेध हाेने की पूरी संभावना है. यदि आयुक्त नागरिकाें के साथसाथ नगरसेवकाें और जनप्रतिनिधियाें के विराेध काे दरकिनार कर, कड़ा रुख अपनाते हुए इसका प्रत्यक्ष अमल करते हैं, ताे ये सभी केंद्र शुरू हाे सकते हैं. अन्यथा स्थिति पहले जैसी ही ढाक के तीन पात की तरह हाे सकती है. परिणामस्वरूप शहर की कचरा समस्या और अधिक उग्र हाे सकती है. मनपा के माेशी कचरा डिपाे के वेस्ट टू एनर्जी प्राेजेक्ट में प्रशासनिक बिल्डिंग गिरने से 9 कर्मचारियाें की अकारण ही माैत हाे गई थी, जबकि कई कर्मचारी घायल हाे गए थे. इस दुर्घटना के कारण शहर की कचरा समस्या एक बार फिर गंभीर रूप से सामने आ गई है.
कचरा डिपाे की क्षमता समाप्त हाेने के कारण स्थानीय नगरसेवकाें ने वहां कचरा डालने का विराेध किया है. वर्तमान में डिपाे में कचरा डालने के लिए रास्ता उपलब्ध न हाेने के कारण शहर में कचरे का संकट पैदा हाे गया है. देहूराेड कैन्टाेंमेंट बाेर्ड के निगड़ी स्थित पुराने कचरा डिपाे में फिलहाल अस्थायी विकल्प के रूप में कचरा डाला जा रहा है.
माेशी डिपाे के विकल्प के रूप में आयुक्त डाॅ. विजय सूर्यवंशी ने घाेषणा की है कि सभी 10 क्षेत्रीय कार्यालयाें में एक-एक, यानी कुल दस स्थानाें पर अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित कचरा प्राेसेसिंग केंद्र शुरू किए जाएंगे. उन केंद्राें में बायाे-सीएनजी प्राेजेक्ट लागू किया जाएगा. उन्हाेंने दावा किया है कि इससे दुर्गंध नहीं आएगी. इसके लिए न्यूनतम 10 से 15 एकड़ भूमि निश्चित कर अगले 3 महीनाें में डीपीआर (विस्तृत परियाेजना रिपाेर्ट) तैयार करने के निर्देश आयुक्त ने दिए हैं. इसके बाद मंजूरी लेकर प्रत्यक्ष रूप से केंद्र शुरू किए जाएंगे. हालांकि पुराने अनुभवाें काे देखते हुए निवासी और साेसायटी मालिक अपने घर के पास कचरा प्राेसेसिंग केंद्र शुरू करने की सहमति नहीं देते हैं. नागरिकाें का विराेध हाेने के कारण नगरसेवक और जनप्रतिनिधि भी उस मांग का समर्थन करते हैं. इस अनुभव काे ध्यान में रखते हुए आयुक्त काे कड़ा रुख अपनाकर कचरा प्राेसेसिंग केंद्र शुरू करने के लिए काफी मश्नकत करनी पड़ेगी. उन्हें तत्कालीन आयुक्त श्रीकर परदेशी की तरह कठाेर रुख अपनाकर कार्रवाई करनी हाेगी. कल्याण डाेंबिवली मनपा में आयुक्त रहते हुए उन्हाेंने कचरे के वर्षाें पुराने पहाड़ाें काे हटा दिया था. इसके लिए उन्हाेंने भारी विराेध काे दरकिनार कर दिया था. उस अनुभव काे देखते हुए, यह उत्सुकता बनी हुई है कि आयुक्त शहर में कचरा प्राेसेसिंग केंद्र शुरू करने में सफल हाेंगे या उन्हें कदम पीछे खींचने पड़ेंगे...
शहर के 16 कचरा ट्रांसफर केंद्राें का नागरिकाें द्वारा हुआ था भारी विराेध शहर में इकट्ठा हाेने वाले कचरे काे माेशी कचरा डिपाे तक ले जाने के लिए वर्ष 2023 में प्रत्येक क्षेत्रीय कार्यालय में दाे के हिसाब से कुल 16 कचरा स्थानांतरण केंद्र बनाए जा रहे थे. कासारवाड़ी, गवलीमाथा, कालेवाड़ी, सांगवी, पिंपले गुरव, चिंचवड़, आकुर्डी के खंडाेबा माल, चाेविसावाड़ी, किवले और बाेर्हाडेवाड़ी आदि स्थानाें पर इन केंद्राें काे बनाने की याेजना थी. इसके लिए केंद्र सरकार से 46 कराेड़ रुपये का फंड मिला था. लेकिन नागरिकाें के विराेध के कारण केवल कासारवाड़ी, गवलीमाथा, कालेवाड़ी और किवले, ये चार ही केंद्र शुरू हाे सके.
गीले कचरे से खाद बनाने काे लेकर हाउसिंग साेसायटियाें का रिस्पांस नहीं शहर की बड़ी हाउसिंग साेसायटियाें के लिए गीले कचरे काे प्राेसेस कर खाद बनाना अनिवार्य किया गया है. सुप्रीम काेर्ट ने स्थानीय निकायाें काे इसे प्रत्यक्ष रूप से लागू करने के आदेश दिए हैं.
इसके अनुसार, मनपा के स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसे 1 जुलाई से लागू किया जाना था, लेकिन जनप्रतिनिधियाें के दबाव के आगे झुकते हुए प्रशासन ने इस पर राेक लगा दी है.
एसटीपी स्थापित करने में उदासीनता बड़ी हाउसिंग साेसायटियाें के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करना अनिवार्य है. ऐसी कुल 494 साेसायटियाें काे नाेटिस जारी किए गए थे. पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग द्वारा जांच कर जुर्माने की कार्रवाई की जा रही है. कार्रवाई के बावजूद, यह चित्र सामने आया है कि 99 हाउसिंग साेसायटियाें की ओर से एसटीपी शुरू करने में काेई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है.