पाषाण, 20 जुलाई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)ग्रीन हाइड्रोजन की आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, भू-राजनीतिक जोखिमों और बाजार में उतार-चढ़ाव के संदर्भ में किया जाना चाहिए. क्योंकि हाइड्रोजन सेक्टर में निवेश लगातार बढ़ रहा है, जो हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था में वैेिशक भरोसे को दर्शाता है. इंडस्ट्री ने टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट से आगे बढ़कर, वैल्यू चेन में रणनीतिक साझेदारियों के जरिए इंटीग्रेटेड, एंड-टू- एंड समाधानों की ओर बढ़ें. यह विचार नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के निदेशक डॉ. प्रसाद चाफेकर ने व्यक्त किए. सीएसआईआर-राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (एनसीएल) ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के जरिए अपने कैंपस में ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम के विकास पर आयोजित स्टेकहोल्डर मीट में वे बोल रहे थे. इस कार्यक्रम को महाराष्ट्र एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी और राज्य सरकार का सहयोग मिला. इसमें देश भर से नीति-निर्माता, इंडस्ट्री लीडर्स, रिसर्चर, टेक्नोलॉजी डेवलपर्स, एकेडेमिया और हाइड्रोजन इकोसिस्टम से जुड़े स्टेकहोल्डर्स शामिल हुए. एनसीएल के निदेशक डॉ. आशीष लेले ने कहा कि पारंपरिक ऊर्जा की असली कीमत बाजार की कीमतों से कहीं अयादा होती है, क्योंकि आख़िरकार समाज को ही जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण के नुकसान और ऊर्जा असुरक्षा का आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ग्रीन हाइड्रोजन का मूल्यांकन इसी व्यापक संदर्भ में किया जाना चाहिए. उद्घाटन सत्र में आघारकर अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. प्रशांत ढाकेफलकर मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे. उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन न सिर्फ भविष्य के लिए एक साफ-सुथरा ईंधन है, बल्कि उभरते ग्लोबल कार्बन नियमों के बीच केमिकल इंडस्ट्री के लिए एक जशरी कच्चा माल भी है.