‌‘गुरु गुणगान चातुर्मास‌’ का भव्य शुभारंभ

मुनिसुव्रत स्वामी जिन गुरुमंदिर में गुरु-भक्ति का महासागर उमड़ा

    22-Jul-2026
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शुक्रवार पेठ, 21 जुलाई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

 पुणे की शुक्रवार पेठ स्थित श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिन गुरुमंदिर में सौधर्म बृहत्तपोगच्छीय त्रिस्तुतिक जैन संघ के तत्वावधान में वेिशवंदनीय, मोहनखेड़ा तीर्थ के नायक, अभिधान राजेंद्र कोष के प्रणेता प. पूण दादागुरुदेव श्रीमद्‌‍ विजय राजेंद्र सूरेीशरजी म. सा. के जन्म द्विशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित गुरु गुणगान चातुर्मास का रविवार (19 जुलाई) को मंगलमय शुभारंभ हुआ. प. पू. मुनिराज डॉ. लाभेशविजयजी महाराज एवं प. पू. मुनिराज श्री ललितेशविजयजी महाराज के पुणे चातुर्मास प्रवेश ने संपूर्ण वातावरण को गुरु-भक्ति के दिव्य उत्सव में परिवर्तित कर दिया. इस अवसर पर प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा. सैकड़ों गुरु-भक्तों, महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों ने बैंड, ढोल,नगाड़ों और मंगलध्वनियों के मध्य नृत्य करते हुए गुरु-वंदना की. श्रद्धा, उल्लास और समर्पण से सजी यह शोभायात्रा जयराज भवन पहुंची, और विराट धर्मसभा में परिवर्तित हो गई. मंच पर ललित परमार एवं युवा भजन गायक तरुण मोदी की सुमधुर जुगलबंदी ने कार्यक्रम को ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया. धर्मसभा का शुभारंभ परम पूज्य मुनिराज डॉ. लाभेश विजयजी महाराज के मंगलाचरण से हुआ. इसके उपरांत गुरु गुणगान चातुर्मास के चारों मुख्य लाभार्थी परिवारों तथा सौधर्म बृहत्तपोगच्छीय त्रिस्तुतिक जैन संघ के ट्रस्टीगण एवं विशेष आमंत्रित अतिथियों ने दादागुरुदेव की पावन प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया. इस अवसर पर अपने उद्बोधन में परम पूज्य मुनिराज श्री ललितेशविजयजी महाराज ने स्पष्ट किया कि, चातुर्मास केवल वर्षा ऋतु में एक स्थान पर निवास करने की परंपरा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, सेवा, साधना और समाज जागरण का चार माह का दिव्य साधनाकाल है. प. पू. वास्तु विशिष्ट एवं ज्योतिषाचार्य डॉ. लाभेशविजयजी महाराज ने अपने उद्बोधन में दादागुरुदेव श्रीमद्‌‍ विजय राजेंद्रसूरेीशरजी महाराज के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का अत्यंत मार्मिक चित्र उपस्थित किया. लाभार्थी परिवारों ने अपने पुरुषार्थ से अर्जित लक्ष्मी को धर्मकार्यों में समर्पित कर गुरु-भक्ति की अनुपम मिसाल प्रस्तुत की.