शवाजीनगर, 21 जुलाई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) महाराष्ट्र में इस वर्ष मानसून का वितरण असमान बना हुआ है. जून महीने में राज्य में औसत से 47 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी, हालांकि जुलाई के पहले सप्ताह में हुई अच्छी बारिश के बाद वर्षा की कमी कुछ हद तक कम हुई है. इसके बावजूद उत्तर महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में सबसे अधिक 76 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है. जबकि पुणे, रायगढ़ और रत्नागिरि के घाट क्षेत्राें में सामान्य से सबसे अधिक वर्षा रिकाॅर्ड की गई है. यह जानकारी भारत माैसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के क्षेत्रीय प्रमुख डाॅ.एस.डी.सानप ने दी.
डाॅ.सानप ने बताया कि, फिलहाल महाराष्ट्र में मानसून सक्रिय है, लेकिन अधिक वर्षा मुख्य रूप से काेंकण तट, पश्चिमी घाट और पूर्वी विदर्भ में हाे रही है. वहीं, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी है. माैसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनाें के लिए काेंकण तटीय क्षेत्र और घाट क्षेत्राें में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है.
अगले तीन दिनाें तक घाट क्षेत्राें में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है. वहीं, विदर्भ में अगले दाे दिनाें तक ऑरेंज अलर्ट रहेगा, जिसके बाद वहां येलाे अलर्ट लागू किया जाएगा. पूर्वी विदर्भ में अपेक्षाकृत अधिक वर्षा हाेने का अनुमान है. दूसरी ओर, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के लिए फिलहाल काेई चेतावनी जारी नहीं की गई है और इन क्षेत्राें में हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना जताई गई है.
डाॅ. सानप ने बताया कि, इस मानसून में नंदुरबार राज्य का सबसे अधिक वर्षा घाटे वाला जिला रहा है, जहां सामान्य से 76 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. वहीं, पुणे के घाट क्षेत्राें में सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है.
उत्तर महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ के अधिकांश जिलाें में सामान्य से 20 से 30 प्रतिशत या उससे अधिक वर्षा की कमी बनी हुई है.
आंकड़ाें के अनुसार, बीड़ जिले में सामान्य 202 मिमी वर्षा के मुकाबले केवल 111.4 मिमी बारिश हुई है, जिससे 45 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. इसी प्रकार नांदेड़ में सामान्य 287.3 मिमी के मुकाबले 159.7 मिमी वर्षा हुई, जाे 44 प्रतिशत कम है. इसके विपरीत, काेंकण तट और पश्चिमी महाराष्ट्र के घाट क्षेत्राें में सामान्य से काफी अधिक वर्षा दर्ज की गई है.
माैसम विभाग ने बताया कि फिलहाल बंगाल की खाड़ी में काेई नया निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय नहीं है. हालांकि, मानसून की ट्रफ रेखा उत्तर भारत की ओर खिसक गई है.