पिंपरी, 21 जुलाई (आ.प्र.) पिंपरी-चिंचवड़ मनपा के बिल्डिंग परमिशन विभाग की जटिल और लचर कार्यप्रणाली से शहर के मान्यता प्राप्त आर्किटेक्ट्स बुरी तरह परेशान हाे गए हैं.आर्किटेक्ट्स ने आराेप लगाया है कि बिल्डिंग परमिशन के लिए जमा की गई फाइलें मनपा दफ्तर से रहस्यमय तरीके से गायब हाे जाती हैं और अधिकारियाें काे 3-3 महीने तक उनका काेई अता-पता नहीं मिलता. अंततः मजबूरी में उन्हें नक्शाें और दस्तावेजाें की डुप्लीकेट प्रति दाेबारा जमा करनी पड़ती है, जिससे परियाेजनाओं में महीनाें का विलंब हाे रहा है. इसके अलावा, निर्माण विभाग के रिकाॅर्ड रूम से पुराने स्वीकृत नक्शाें की प्रतियां मांगने पर संबंधित कर्मचारी और अधिकारी लगातार टालमटाेल करते हैं.
नक्शा मांगने पर वरिष्ठ अधिकारियाें की विशेष अनुमति लाने का बहाना बनाकर उन्हें बार- बार चक्कर कटवाए जाते हैं.
ऑनलाइन ‘ई-ऑफिस’ प्रणाली सिर्फ आश्वासनाें तक सीमित आर्किटेक्ट्स का कहना है कि मनपा प्रशासन द्वारा ऑनलाइन और पारदर्शी काम का दावा करते हुए शुरू की गई ‘ई-ऑफिस’ कंप्यूटर प्रणाली में आए दिन तकनीकी खराबी बनी रहती है. प्रणाली के सुधार काे लेकर मनपा द्वारा दिए गए आश्वासन केवल कागजाें और बयानाें तक सीमित रहे हैं, जबकि धरातल पर काम पूरी तरह ठप पड़ा है.
आर्किटेक्ट्स ने बताया कि, मनपा प्रशासन में भ्रष्ट अधिकारियाें की भी जांच हाेनी चाहिए. हमें बार-बार गुम हुई फाइलाें के लिए अधिकारियाें के समक्ष तगादा लगाना पड़ता है. ऐसे में कुछ आर्किटे्नट्स ने यह भी कहा, चंद पैसाें के लिए कुछ अधिकारी इस बंद ‘ई- ऑफिस’ प्रणाली का फायदा उठाते है. ऐसे में पारदर्शी प्रशासन हेतु जल्द से जल्द ऑनलाइन प्रणाली काे सुचारू किया जाना चाहिए. साथ ही गुम हुइंर् फाइले लेन-देन के बाद ही मिलती हैं? ऐसे में पारदर्शी प्रशासन (गुड गवर्नेंस) की छवि काे चंद अधिकारी बदनाम कर रहे हैं.
ऐसे में यह मुद्दा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है कि, सरकारी दफ्तराें से आखिर फाइलें गायब कैसे हाेती हैं.