शिवाजीनगर, 21 जुलाई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) पुणे शहर में पिछले तीन वर्षाें से सामान्य (प्राकृतिक) प्रसव की तुलना में सिजेरियन प्रसव के मामलाें में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है. यह जानकारी पुणे मनपा के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ाें से सामने आई है. सामान्यतः अधिकांश गर्भवती महिलाएं और उनके परिवार प्राकृतिक प्रसव काे ही प्राथमिकता देते हैं.
हालांकि, उच्च जाेखिम वाली गर्भावस्था, गर्भ की असामान्य स्थिति, पहले सिजेरियन प्रसव का इतिहास, प्रसव के दाैरान संभावित जटिलताओं तथा मां और शिशु की सुरक्षा काे ध्यान में रखते हुए सिजेरियन प्रसव काे अधिक प्राथमिकता दी जा रही है.
मनपा के आंकड़ाें के अनुसार वर्ष 2021-22 में शहर में 35 हजार 957 सामान्य तथा 23 हजार 817 सिजेरियन प्रसव हुए थे. इसके बाद वर्ष 2022-23 में पहली बार सिजेरियन प्रसव की संख्या 29 हजार 103 तक पहुंच गई, जाे सामान्य प्रसव के 28 हजार 4 मामलाें से अधिक रही. वर्ष 2023-24 में 29 हजार 101 सामान्य प्रसव के मुकाबले 34 हजार 672 सिजेरियन प्रसव दर्ज किए गए. वहीं अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 के दाैरान 21 हजार 639 सामान्य तथा 26 हजार 850 सिजेरियन प्रसव हुए हैं. सहायक स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. राजेश दिघे ने बताया कि पहले की तुलना में उच्च जाेखिम वाली गर्भावस्थाओं की संख्या बढ़ी है. ऐसे मामलाें में मां और शिशु की सुरक्षा काे सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए चिकित्सक तथा अनेक परिवार सिजेरियन प्रसव का विकल्प चुन रहे हैं.
विशेषज्ञाें के अनुसार सिजेरियन एक जीवनरक्षक शल्यक्रिया है, लेकिन इसे केवल चिकित्सकीय आवश्यकता हाेने पर ही किया जाना चाहिए. सामान्य प्रसव में मां शीघ्र स्वस्थ हाे जाती है, संक्रमण और रक्तस्राव का जाेखिम अपेक्षाकृत कम रहता है, अस्पताल में कम दिन रुकना पड़ता है तथा खर्च भी कम आता है.