दि पूना गुजराती केलवणी मंडल का स्वर्णिम क्षण ‌‘शताब्दी समारोह‌’

शिक्षा, चरित्र निर्माण और समाज सेवा के लिए समर्पित मिशन; विज्ञान और तकनीक, रिसर्च, कौशल और उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा

    25-Jul-2026
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gvfgv 
द पूना गुजराती केलवणी मंडल इस साल अपनी स्थापना के सौ साल पूरे होने पर शताब्दी समारोह मना रहा है. शिक्षा, चरित्र निर्माण और समाज सेवा के समर्पित मिशन के साथ 26 जुलाई, 1926 को स्थापित इस संस्था ने सौ साल का प्रेरणादायक सफर पूरा किया है और अब आत्मवेिशास के साथ एक नई सदी में कदम रख रही है. संस्था ने अच्छी शिक्षा, मूल्यों पर आधारित परवरिश और सामाजिक जिरमेदारी का बेहतरीन तालमेल बिठाकर हजारों छात्रों का भविष्य संवारा है. मातृभाषा को बचाए रखते हुए, संस्था आधुनिक शिक्षा, विज्ञान और तकनीक, रिसर्च, कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देकर समय के साथ लगातार आगे बढ़ी है. आज, मंडल के अलग-अलग शिक्षण संस्थानों में लगभग दस हजार छात्र अपनी पढ़ाई कर रहे हैं. महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज के समय से बसे गुजराती समुदाय ने पेशवाकाल के दौरान पुणे में व्यापार, उद्योग, सामाजिक गतिविधियों और संस्कृति के क्षेत्रों में अपनी एक अलग पहचान बनाई. आर्थिक तरक्की के साथ-साथ शिक्षा, भाषा और सामाजिक उत्थान के महत्व को समझते हुए, समुदाय के दूरदर्शी नेतृत्व ने आने वाली पीढ़ियों के लिए 26 जुलाई, 1926 को ‌‘द पूना गुजराती केलवणी मंडल‌’नाम की धर्मार्थ संस्था की स्थापना की.शिक्षा-प्रेमी समुदाय के नेताओं - राव बहादुर सेठ लल्लूभाई दामोदरदास शाह, प्रो. जे. पी. त्रिवेदी, धनसुखभाई दादावाला, अंबुभाई वाशी और गोवर्धनदास विट्ठलदास शाह-ने संस्थान की मजबूत नींव रखी. शुरुआत से ही, संस्था ने मातृभाषा, सांस्कृतिक मूल्यों और अच्छी शिक्षा को प्राथमिकता दी. साथ ही बदलते समय के अनुसार आधुनिक शिक्षण तरीकों को भी अपनाया है. संस्था आने वाले शैक्षणिक सत्र से कसबा पेठ में अत्याधुनिक पीजीकेएम स्कूल बना रही है. हाल ही में पीजीकेएम स्पोर्ट्स अकादमी की स्थापना की गई है. अपने पाठ्यक्रम में लगातार नवाचार को अपनाते हुए स्वायत्त वेिशविद्यालय स्थापित करने का फ!सला किया है.‌‘प्रवृत्तिलक्षणो योगः‌’ के आदर्श वाक्य को अपनाते हुए, शताब्दी समारोह सिर्फ पिछली उपलब्धियों को याद करने का मौका नहीं है, बल्कि शिक्षा के जरिए सामाजिक विकास के दायरे को बढ़ाने का एक नया संकल्प भी है. एक सदी से चली आ रही समृद्ध विरासत और दूरदर्शी सोच के साथ, दि पूना गुजराती केलवणी मंडल नई सदी में भी ज्ञान, मूल्यों और प्रगति की ज्योति को प्रज्वलित रखने के लिए प्रतिबद्ध है.