पुणे, 25 जुलाई ( आज का आनंद न्यूज नेटवर्क )
आषाढी एकादशी के अवसर पर शनिवार (25 जुलाई) को शहर में विभिन्न विठ्ठल मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुआें की दर्शन के लिए भीड लगी थी. विठ्ठल-विठ्ठल श्री हरि विठ्ठल, पंढरीनाथ महाराज की जय.. के जयकारों के साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण में आषाढी एकादशी का उत्साह शहर में दिखाई दिया. घर-घर में भी धार्मिक कार्यक्रमों के साथ भक्तिमय वातावरण में आषाढी एकादशी मनाई गई. सिंहगढ रोड स्थित विठ्ठल मंदिर में सुबह विठ्ठल रुक्मिणी की मूर्ति का अभिषेक किया गया. साथ ही भरजरी वस्त्र और आभूषण पहनाए गए. खासकर आषाढी एकादशी के अवसर पर विठ्ठल और रुक्मिणी की मूर्तियों को तुलसी की मालाओं से भी सजाया गया.भवानी पेठ स्थित पालखी विठ्ठल मंदिर, नाना पेठ स्थित निवडुंगा विठोबा मंदिर में भी सुबह धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ विठ्ठल रुक्मिणी की मूर्तियों की पूजा-अर्चना की गई. विठ्ठल मंदिर (लकडीपुल), विठ्ठल मंदिर (नवी पेठ), विठ्ठल मंदिर (शेडगे विठोबा चौक), झांजले विठ्ठल मंदिर (बाजीराव रोड), विठ्ठल मंदिर (सदाशिव पेठ) साथ ही उपनगरों में भी विभिन्न विठ्ठल मंदिरों में भक्तिमय वातावरण दिखाई दिया. मंदिरों को आकर्षक फूलों सहित, विद्युत रोशणाई के साथ सजाया गया था. विभिन्न मंदिरों में महिला और पुरुषों के लिए दर्शनबारी की अगल व्यवस्था भी की गई थी. भजन,कीर्तन के साथ ही धार्मिक स्त्रोत्रों के पठन के कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया था. घर-घर में भी उपवास के व्यंजन बनाए गए थे. मंदिरों में साबूदाना की खिचडी, केला, राजगिरा लड्डू और अन्य उपवास के पदार्थों का भोग विठ्ठल रुक्मिणी को चढाया गया. वही भोग का प्रसाद श्रद्धालु भी बडी श्रद्धा से स्वीकार कर रहे थे. पूरे दिन शहर में विठ्ठल नाम की गूंज ही सुनाई दे रही थी. भवानी पेठ स्थित पालखी विठ्ठल मंदिर के विश्वस्त गोरखनाथ भिकुले ने बताया कि, हर साल आषाढी वारी के अवसर पर संत ज्ञानेश्वर महाराज की पालकी मंदिर में मुकाम के लिए ठहरती है. आषाढी एकादशी के अवसर पर मंदिर में विठ्ठल रुक्मिणी की मूर्तियों की विश्वस्तों द्वारा धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा- अर्चना की गई. मंदिर व्यवस्थापन द्वारा दिनभर श्रद्धालुओं को खिचडी का प्रसाद दिया गया. भजन और कीर्तन का भी आयोजन किया गया था. नाना पेठ स्थित निवडुंगा विठोबा मंदिर के व्यवस्थापक आनंद पाध्ये ने बताया कि, संत तुकाराम महाराज की पालकी हर साल मंदिर में मुकाम के लिए ठहरती है. आषाढी एकादशी के अवसर पर मंदिर में विठ्ठल रुक्मिणी की मूर्तियों की विश्वस्तों द्वारा विधि विधान से पूजा- अर्चना की गई. दोपहर में महानैवेद्य दिखाया गया. साथ ही श्रद्धालुओं को खिचडी का प्रसाद बांटा गया.