विमाननगर, 25 जुलाई ( आज का आनंद न्यूज नेटवर्क )
आयकर विभाग सरकार का ऐसा विभाग है जिसने तकनीक को सबसे कुशलता से अपनाया है. डिजिटल सुधार, राजस्व लक्ष्य या नए कानूनों के तहत आयकर परिवार का समर्पण रहा है. इससे मानवीय हस्तक्षेप व पक्षपात कम हुआ है और पारदर्शिता आई है. तकनीकों के कारण अनौपचारिक क्षेत्र का एक बहुत बड़ा हिस्सा अब औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन गया है, यह जानकारी पुणे विभाग के प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त विवेक वाडेकर ने दी. आयकर विभाग द्वारा शुक्रवार (24 जुलाई ) को 167 वें आयकर दिन के अवसर पर, विमाननगर स्थित सिंम्बायोसिस ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में वे बोल रहे थे. मंच पर डायरेक्टर जनरल ऑफ इन्कम टैक्स जगजीवनकुमार गर्ग उपस्थित थे. इस अवसर पर आयकर विभाग द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विशेष उल्लेखनीय कार्य करनेवाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया. साथ ही नियमित करदाताओं में बैंक ऑफ महाराष्ट्र, जॉन्डियर इंडिया प्रा.लि., एमएनजीएल कंपनी और व्यक्तिगत रूप से करदाता श्रद्धा अनिष करिवाला को सम्मानित किया गया. प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त विवेक वाडेकर ने कहा कि, पुणे क्षेत्र ने आर्थिक वर्ष 2025- 26 में 1,33,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान दिया है. पुणे क्षेत्र देश में छठे स्थान पर है. पुणे वित्तीय सेवाओं और आईटी/कंप्यूटर सेवाओं का बड़ा केंद्र है. यहां राजस्व में निरंतर वृद्धि हुई है. आज हम एआई-संचालित इनसाइट्स तक पहुंच चुके हैं; भौतिक जांच से फेसलेस असेसमेंट और सख्त प्रवर्तन से वेिशास-आधारित प्रशासन की ओर बढ़े हैं. उन्होंने कहा कि, तकनीक लागू करते समय कानूनी बदलाव भी आवश्यक होते हैं और हमने कई कानूनी लड़ाइयां लड़ी हैं. आयकर प्रणाली में कई जटिलताएं होती हैं. इसके बावजूद तकनीक को विभिन्न रूपों में अपनाया गया. चाहे वह जन धन खाते हों, यूपीआई, आधार या डीबीटी (डायरेक्टर बेनिफिट ट्रान्सफर) हो. इन तकनीकों के कारण अनौपचारिक क्षेत्र का एक बहुत बड़ा हिस्सा अब औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन गया है. तकनीक के उपयोग का मुख्य उद्देश्य आयकर रिटर्न का सरलीकरण हो, ऑटो-पॉपुलेटेड रिटर्न हों, इसी वजह से आज त्वरित रिफंड और शिकायतों का शीघ्र निवारण संभव हो पाया है. पुणे विभाग के आयकर महानिदेशक(जांच) जगजीवनकुमार गर्ग ने कहा कि, दशकों से, कर व्यवस्था को अक्सर आशंका और झिझक के दृष्टिकोण से देखा जाता था. आज, हमें इस धारणा को स्पष्ट रूप से बदलना होगा. कर चुकाने वाला प्रत्येक व्यक्ति और संस्थान भारत के भविष्य में एक सक्रिय निवेशक है. हमारे करदाता केवल सरकारी बजट को वित्तपोषित ही नहीं करते, बल्कि वे सीधे तौर पर एक विकसित राष्ट्र के सपने को साकार करने का बीड़ा उठाते हैं. टैक्स रिटर्न की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए प्री-फिल्ड कॉम्प्लायंस मॉड्यूल से करदाता के लिए यह प्रक्रिया किसी डिजिटल लेनदेन जैसी सरल हो गई है. आयकर आयुक्त (प्रशासन ) मनीष कुमार ने स्वागत पर भाषण दिया. अतिरिक्त आयकर आयुक्त शशांक देवगडकर ने धन्यवाद ज्ञापन किया.