शिवाजीनगर, 26 जुलाई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
वरिष्ठ नेता शरद पवार ने कहा कि डॉ. कुमार सप्तर्षि ने महाराष्ट्र गांधी स्मारक निधि की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेकर महात्मा गांधी के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया. उन्होंने कहा कि आज इन संस्थाओं को बचाना आवश्यक है, क्योंकि ये केवल संस्थाएं नहीं बल्कि एक विचारधारा हैं. गांधीजी के विचारों का संरक्षण और विस्तार करना डॉ. कुमार सप्तर्षि का जीवन-व्रत था और अब उनकी इस विरासत को आगे बढ़ाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. महाराष्ट्र गांधी स्मारक निधि, यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान और युवक क्रांति दल के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को बालगंधर्व में महाराष्ट्र गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष, युवक क्रांति दल के संस्थापक, पूर्व विधायक तथा ‘सत्याग्रही’ मासिक के संपादक डॉ. कुमार सप्तर्षि को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सभा आयोजित की गई. कार्यक्रम में डॉ. कबीर उमा कुमार, महाराष्ट्र गांधी स्मारक निधि के ट्रस्टी शिवाजीराव कदम, सचिव अनवर राजन तथा यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान के एडवोकेट अंकुश काकड़े मंच पर उपस्थित थे. लोकमत के संपादक संजय आवटे ने कहा कि आज विचार करने वाले नेतृत्व नहीं करते और नेतृत्व करने वाले विचार नहीं करते. ऐसे समय में डॉ. कुमार सप्तर्षि विचार और नेतृत्व का अद्भुत संगम थे. उन्होंने गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर और जवाहरलाल नेहरू के विचारों को जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास किया. उनके अनुसार डॉ. सप्तर्षि का महत्व उनके प्रभाव से नहीं बल्कि आज उनके अभाव से अधिक महसूस होता है. अशोक वानखेड़े ने कहा कि गांधी की पूजा करने वाले लोग तो बहुत हैं, लेकिन उनके विचारों को आत्मसात करने वाले कम होते जा रहे हैं. उन्होंने गांधी भवन की गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता जताई. युवाओं के हालिया आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा के साथ सही विचार भी जरूरी हैं और डॉ. कुमार सप्तर्षि जैसे मार्गदर्शक की कमी हमेशा महसूस होगी. अनवर राजन ने कहा कि समयाभाव के कारण सभी लोगों को मंच से श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं मिल सका. श्रद्धांजलि लेख ‘सत्याग्रही विचारधारा’ अंक में प्रकाशित किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि डॉ. कुमार सप्तर्षि युवक क्रांति दल के विसर्जन के पक्ष में नहीं थे, इसलिए उन्होंने संगठन को पुनः सक्रिय किया. उन्होंने अभिजीत दिपके से संपर्क कर येरवडा वेिशविद्यालय के दिन पुस्तक उपलब्ध कराई. उर्मिला सप्तर्षी के निरंतर सहयोग से ही डॉ. कुमार सप्तर्षि समाज में प्रभावी ढंग से कार्य कर सके. कॉमरेड अजित अभ्यंकर ने कहा कि चातुर्वर्ण व्यवस्था के समर्थन पर शंकराचार्य को धार्मिक ग्रंथों के आधार पर खुली चुनौती देने का साहस केवल डॉ. कुमार सप्तर्षि में था. आज ऐसे व्यक्तित्व दुर्लभ हैं. उन्होंने कहा कि युवक क्रांति दल के संस्थापक डॉ. कुमार सप्तर्षि युवाओं के आंदोलन की यह बड़ी सफलता देखने के लिए आज हमारे बीच नहीं हैं, इसका हमेशा दुख रहेगा. इस अवसर पर दिलीप वलसे पाटिल, पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, सुभाष वारे, उल्हास पवार, शिवाजीराव कदम, सूर्यकांत पाठक, उपमहापौर परशुराम वाडेकर, आम आदमी पार्टी के मुकुंद किर्दत, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के गजानन थरकुडे तथा एडवोकेट एस. के. जैन सहित अनेक राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने डॉ. कुमार सप्तर्षि को श्रद्धांजलि अर्पित की.
किसानों व युवाओं हेतु सरकारी नीति बनाने की मांग करते रहे शरद पवार ने कहा कि हाल के वर्षों में पुणे की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिशें हो रही हैं. ऐसे समय में गांधीजी के विचारों और गांधी भवन जैसी संस्थाओं की रक्षा करना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि डॉ. कुमार सप्तर्षी की विचारधारा पर काम करने वाले लोगों के साथ खड़ा रहना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. सप्तर्षि हमेशा सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों और युवाओं के लिए प्रभावी सरकारी नीति बनाने की मांग करते रहे. वे विधानसभा और सरकार के समक्ष लगातार यह विषय उठाते थे.
जाति और धर्म से ऊपर मानवता का पाठ पढ़ाया डॉ. कबीर उमा कुमार ने अपने पिता से जुड़ी पारिवारिक स्मृतियां साझा करते हुए कहा कि डॉ. कुमार सप्तर्षि ने उन्हें जाति और धर्म से ऊपर मानवता का पाठ पढ़ाया. उन्होंने बताया कि इसी सोच के कारण उनके नाम के साथ उपनाम नहीं जोड़ा गया और बाद में उन्होंने अपने पुत्र का नाम भी रेहान दीप्ति कबीर रखा.