मलाड, 25 जुलाई (आ.प्र.)
जिनशासन का अखंड हित सोचने वाले, देलवाड़ा- मीरपुरादी तीर्थ उद्धारक सूरीशांतिचंद्र धर्म साम्राज्य के समर्थ वाहक, गच्छलंकार, समर्थ गच्छाधिपति प.पू. आचार्य भगवान श्रीमद् विजय सोमसुंदरसूरीश्वरजी महाराजा, श्रीसंघ के यशस्वी मार्गदर्शक प.पू. आचार्य भगवान श्री विजय पुण्यसुंदरसूरीश्वरजी महाराजा, श्रुतप्रेमी प.पू. आचार्य भगवान श्री विजय श्रुतसुंदरसूरीश्वरजी महाराजा, पर्याय-श्रुत स्थविर मुनि श्री भाग्यसुंदर विजयजी म.सा. आदि 14 वर्षों की दीर्घ अवधि के पश्चात श्रमण-श्रमाणियों के विशाल समूह ने शुक्रवार, 24 जुलाई को उपाश्रय में सोम समवेगी राजवाड़ी चातुर्मास प्रवेश किया. उसके बाद उपाश्रय से गुरु भगवंत के साथ भव्य शोभायात्रा मलाड के विभिन्न मार्गो से होते हुए, मलाड सोसाइटी ग्राउंड, गोल गार्डन के पास धर्म सभा में परिवर्तित हो गई. गुरु भगवंत ने धर्म सभा को हितशिक्षा देते हुए कहा, संकल्प करो कि चार महीने का चातुर्मास उत्सव नहीं छोड़ेंगे. तुम्हें इस मनुष्य जन्म में भी जैन शासन मिला है. अगर आज का जीव जन्म की दुर्लभता को समझ लें, तो हमारा चातुर्मास सार्थक हो जाएगा. जन्म की दुर्लभता को समझना चाहिए, भगवान के वचनों पर दिल में अटूट विश्वास जगाना चाहिए, भले ही संयम ना ले सके, फिर भी संयम लेने जैसा है, संयम बिना आत्मा का उद्धार नहीं है यह भावना पैदा होनी चाहिए. आओ, हम चार महीने आराधना से जुड़कर विराघना से दूर रहें, मानवता को प्रकट करने का प्रयास करें. चातुर्मास के दौरान अपनी आत्मा पर लगे दोषों को दूर कर के अपनी आत्मा का कल्याण करें, तो हमारा चातुर्मास सार्थक होगा. श्री संघ के अध्यक्ष कुमारभाई ने विशेष जानकारी देते हुए कहा कि मलाड में श्री घन्ना शालीभद्र जैन संघ की गुरुदेव के दिल में बस एक ही भावना है कि चारों पंथ के जैन समाज एक होकर साथ चले. गुरुदेव की प्रेरणा के पश्चात, पूरे चातुर्मास के दौरान होने वाले अलग-अलग धार्मिक आयोजनों की घोषणा की गई.