माेशी हादसे के बाद शहर की कचरा डम्पिंग व्यवस्था चरमराई

कचरा जगह-जगह जमा करना बना खतरनाक : दुर्गंध व गंदगी के चलते नागरिकाें के स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा

    27-Jul-2026
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moshi
पिंपरी, 26 जुलाई (आ.प्र.) माेशी कचरा डिपाे में हुई दुर्घटना के बाद पिंपरी-चिंचवड़ शहर की कचरा प्रबंधन प्रणाली पूरी तरह चरमरा गई है. शहर के कचरा संग्रहण केंद्र लबालब भरे हुए हैं, वहीं खुले मैदानाें, खाली भूखंडाें, सड़काें के किनाराें और नए बने पुलाें पर भी कचरे के ढेर फेंके जा रहे हैं. इस वजह से ‘स्मार्ट सिटी’ का दावा करने वाले मनपा प्रशासन के कचरा प्रबंधन में पूरी तरह विफल रहने पर नागरिकाें में भारी आक्राेश है.
 
माेशी कचरा डिपाे में कचरे का एक बड़ा ढेर 8 जुलाई काे ‘वेस्ट-टू-एनर्जी’ प्राेजेक्ट की प्रशासनिक बिल्डिंग पर गिर गया था. इस हादसे में 9 कर्मचारियाें की माैत हाे गई थी. दुर्घटना के बाद डिपाे में कचरा स्वीकार करने और उस पर प्राेसेसिंग करने की व्यवस्था प्रभावित हुई. डिपाे कुछ दिनाें तक बंद रहने के बाद आंशिक रूप से शुरू ताे किया गया, लेकिन शहर के अधिकांश कचरे काे वैकल्पिक स्थानाें पर भेजने की नाैबत मनपा पर आ गई है. माेशी डिपाे दुर्घटना के बाद कचरा ट्रांसपाेर्ट की श्रृंखला टूट गई. विभिन्न इलाकाें से कचरा जमा कर लाने वाली गाड़ियाें काे खाली करने के लिए जगह नहीं मिलने के कारण उन्हें संग्रहण केंद्राें पर घंटाें खड़ा रहना पड़ रहा है. कई केंद्राें की क्षमता समाप्त हाेने से वहां कचरे के पहाड़ बन गए हैं. नतीजतन, बस्तियाें से घरेलू कचरा उठाने का काम भी प्रभावित हुआ है. शहर के खुले मैदानाें, खाली भूखंडाें और सड़काें के किनारे कचरा फेंके जाने की शिकायतें बढ़ गई हैं. कुछ जगहाें पर रात के समय कचरे की गाड़ियां खाली किए जाने का आराेप स्थानीय नागरिकाें द्वारा लगाया जा रहा है. शहर के लिए केवल एक ही प्रमुख कचरा डिपाे पर निर्भर रहने काे खुद मनपा आयुक्त ने दुर्भाग्यपूर्ण माना है.
 
मानसून के दाैरान जगह-जगह जमा कचरा और अधिक खतरनाक साबित हाे रहा है. बारिश के पानी से कचरा तेजी से सड़ रहा है, जिससे बदबूदार पानी बहकर सड़काें, नालियाें और आसपास की जमीन में मिल रहा है. कचरे के आसपास मक्खियाें, मच्छराें, चूहाें और अन्य कीड़ाें का प्रकाेप बढ़ने से नागरिकाें के स्वास्थ्य का संकट गंभीर हाेता जा रहा है. उल्टी, दस्त, बुखार, त्वचा राेग और श्वसन संबंधी बीमारियाें का खतरा बढ़ गया है. विशेष रूप से छाेटे बच्चाें, बुजुर्गाें, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार नागरिकाें के स्वास्थ्य पर इसका असर पड़ने की आशंका है. आने वाले दिनाें में बारिश तेज हाेने पर स्थिति और गंभीर हाे सकती है. इसलिए नागरिकाें ने जमा कचरे काे तुरंत हटाकर क्षेत्र काे कीटाणुरहित करने की मांग की है.
 
‘स्मार्ट सिटी’ का दावा सिर्फ कागजाें पर? एक तरफ मनपा स्मार्ट सिटी, स्वच्छ शहर और पर्यावरण-अनुकूल विकास के दावे करता है; वहीं दूसरी तरफ नए बने पुल और सड़काें के किनारे अवैध कचरा डिपाे बनते जा रहे हैं. शहर के लाखाें नागरिकाें के दैनिक जीवन से जुड़े कचरा-प्रबंधन के लिए हादसे से पहले काेई सक्षम वैकल्पिक व्यवस्था न बनाया जाना इस संकट से स्पष्ट हाे गया है. यदि एक डिपाे में काम रुकते ही पूरे शहर की स्वच्छता व्यवस्था ठप हाे जाती है, ताे मनपा का आपातकालीन नियाेजन आखिरकार कहाँ है, यह सवाल उठाया जा रहा है. शहर में दैनिक कचरा उत्पादन, परिवहन और प्रसंस्करण काे ध्यान में रखते हुए विकेंद्रीकृत परियाेजनाएं स्थापित करना आवश्यक था. हालांकि, वर्षाें से केवल माेशी डिपाे पर निर्भर रहने के कारण ही शहर पर यह नाैबत आई है, ऐसी आलाेचना की जा रही है.
 
प्रशासन के सामने वर्तमान समय में चुनाैतियां सड़काें और खाली जगहाें से कचरा तुरंत उठाना सभी कचरा संग्रहण केंद्राें काे खाली करना वैकल्पिक प्राेसेसिंग केंद्राें की क्षमता बढ़ाना प्रभावित क्षेत्राें में सैनिटाइजेशन और कीटनाशक छिड़काव करना, प्रभाग स्तर पर विकेंद्रीकृत गीला-सूखा कचरा प्राेसेसिंग प्राेजेक्ट शुरू करना, अवैध डंपिंग करने वालाें के खिलाफ कार्रवाई करना और नागरिकाें काे कचरा संग्रहण के समय की स्पष्ट जानकारी देना.