शिवाजीनगर, 26 जुलाई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) पुणे की तेजी से बढ़ती जनसंख्या के साथ शहर की पेयजल आवश्यकता भी लगातार बढ़ रही है. ऐसे में शहर काे पानी उपलब्ध कराने वाली खड़कवासला परियाेजना के अंतर्गत आने वाले खड़कवासला, पानशेत, वरसगांव और टेमघर बांधाें में वर्षाें से जमी गाद निकालकर उनकी जल भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार सहित विभिन्न विभागाें की संयुक्त समिति गठित करने का प्रस्ताव पुणे मनपा की स्थायी समिति में प्रस्तुत किया गया है. इस प्रस्ताव पर प्रशासन से विस्तृत राय मांगी गई है.
स्थायी समिति के सदस्य प्रशांत जगताप और विशाल धनवड़े द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव में कहा गया है कि शहर की बढ़ती जल मांग काे देखते हुए बांधाें की उपयाेगी जल भंडारण क्षमता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक हाे गया है. कई वर्षाें से बांधाें में जमी गाद निकालने का व्यापक कार्य नहीं हाेने के कारण जल संग्रहण क्षमता लगातार घट रही है. इसके परिणामस्वरूप कम वर्षा वाले वर्षाें में शहर काे जल कटाैती तथा एक दिन छाेड़कर पानी की आपूर्ति जैसी व्यवस्था लागू करनी पड़ती है. प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि बांध क्षेत्र में बढ़ती आबादी, अनियंत्रित निर्माण तथा बिना शाेधन किए छाेड़े जा रहे गंदे पानी के कारण पेयजल की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. जल प्रदूषण राेकने तथा बांधाें काे दीर्घकालीन जल स्राेत के रूप में सुरक्षित रखने के लिए समन्वित कार्रवाई आवश्यक बताई गई है. इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार, रक्षा मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार, पीएमआरडीए, पुणे जिला परिषद तथा पुणे मनपा के प्रतिनिधियाें की संयुक्त समिति गठित करने की मांग की गई है. यह समिति बांधाें से गाद निकालने, गंदे पानी के प्रबंधन, बांध क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने तथा प्रदूषण राेकने के लिए कार्ययाेजना तैयार करेगी. साथ ही सभी संबंधित विभागाें की वित्तीय भागीदारी तय कर चालू वर्ष के अंत तक कार्य प्रारंभ करने की भी अनुशंसा की गई है.
प्रस्ताव में कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षाें में पुणे काे बार-बार जल संकट का सामना करना पड़ा है और बढ़ते शहरीकरण के कारण यह समस्या और गंभीर हाेती जा रही है. इसलिए नए जल स्राेत तलाशने के साथ-साथ माैजूदा बांधाें की जल भंडारण क्षमता बढ़ाना और जल स्राेताें का संरक्षण करना समय की आवश्यकता है. स्थायी समिति ने इस प्रस्ताव पर प्रशासन से विस्तृत राय मांगी है.
उसके बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा. शहर की भविष्य की जल सुरक्षा की दृष्टि से इस प्रस्ताव काे महत्वपूर्ण माना जा रहा है और अब प्रशासन तथा राज्य सरकार की भूमिका पर सभी की नजरें टिकी हैं.