नई दिल्ली, 27 जुलाई (वि.प्र./वार्ता) गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता साेनम वांगचुक साेमवार काे डिस्चार्ज हाे गए. दाेपहर 1:45 बजे अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वह अपनी पत्नी डाॅ. गीतांजलि के साथ दिल्ली के राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी काे श्रद्धांजलि देने के बाद मीडिया से बातचीत में साेनम वांगचुक ने कहा, मैं देश काे बताना चाहता हूं कि बापू का दिखाया रास्ता आज भी उतना ही सही और प्रासंगिक है, जितना 100 साल पहले था. शांतिपूर्ण आंदाेलन के कारण हमारी जीत हुई है.
हिंसा हाेती ताे मामला बिगड़ सकता था. इसलिए मैंने समय से पहले अनशन खत्म किया. वांगचुक लद्दाख से जुड़े मुद्दाें और नीट पेपर लीक के विराेध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर 26 दिनाें तक अनशन पर बैठे थे. दिल्ली हाईकाेर्ट के आदेश पर पुलिस ने उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के बाद गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया था. साेनम वांगचुक ने कहा- कई लाेग कहते रहे कि ऐसे शासन में गांधी जी का रास्ता काम नहीं करेगा, लेकिन मेरी समझ है कि यह रास्ता सरकार से ज्यादा जनता के दिल तक पहुंचता है. सरकार हमारी बात सुने या न सुने, लेकिन जनता जरूर सुनती है. मैंने गांधी जी के इस प्रयाेग काे सफल हाेते देखा है. इससे पहले हमने लद्दाख में भी उनके बताए रास्ते पर चलकर आंदाेलन किया था. अब मुझे महसूस हुआ कि यह पूरे देश के स्तर पर भी उतना ही प्रभावी है.
वांगचुक ने आगे कहा- मैं देशवासियाें से कहना चाहता हूं कि बापू के दिखाए रास्ते पर चलें. इससे समाधान जरूर निकलता है. देर हाे सकती है, लेकिन अंधेर नहीं हाेता. जरूरी नहीं कि पहली बार में ही सफलता मिल जाए, लेकिन लगातार प्रयास करने से सफलता जरूर मिलती है. हमें दूसराें काे तकलीफ देने के बजाय खुद कठिनाइयाें का सामना करना चाहिए्. यही रास्ता सबसे कठाेर दिल काे भी पिघला सकता है. उन्हाेंने कहा- मैं देश के युवाओं काे बधाई देना चाहता हूं.
उन सभी लाेगाें का भी धन्यवाद, जिन्हाेंने इस आंदाेलन काे शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया. हमें समझना हाेगा कि अगर काेई समाधान निकला है ताे वह हमारी ताकत, लाठी या पत्थर से नहीं, बल्कि शांति और संयम से निकला है. हमने खुद कष्ट सहा, इसलिए बात आगे बढ़ी. अगर हिंसा हाेती, ताे मामला और बिगड़ सकता था. इसी वजह से मुझे शांतिपूर्ण आंदाेलन काे भी तय समय से पहले राेकना पड़ा.