दुनिया अब तेजी से बंटी हुई स्क्रीन पर दिखाई दे रही है. एक तरफ एआई, डाटा सेंटर, मार्केट वैल्यूएशन और कैपिटल में निवेश की भारी बढ़ाेतरी दिख रही है, ताे दुसरी तरफ यह पता चलता है कि जाॅन एफ कैनेडी के जमाने में जिन्हें मूनशाॅट कहा जाता था, वे कैसे भारत व दुनियाभर में तकनीकी कंपनियाें द्वारा इंजीनियराें की भर्ती कम कर रहे हैं.
दरअसल, पिछले हफ्ते चीनी स्टार्टअप मूनशाॅट एआई ने एक नया माॅडल (किमि के3) पेश किया, जिसने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है. के3 के लांच काे एआई इकाेसिस्टम में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि यह अमेरिकी दिग्गज कंपनियाें के बराबर नतीजे बहुत कम लागत में देने का वादा करता है. मूनशाॅट इस दाैड़ का अकेला खिलाड़ी नहीं है. कई और कंपनियां भी हैं. ऐसे में,अगर बेहद कम लागत पर उच्च स्तर की एआई क्षमता उपलब्ध हाेने लगे, ताे माैजूदा काराेबारी माॅडल तेजी से अप्रासंगिक हाे सकते हैं.
भारत की तस्वीर फिलहाल दाे हिस्साें में बंटी हुई दिखाई देती है. एक ओर आईटी कंपनियां डाटा सेंटर, एजेंटिक एआई, बढ़ते निवेश और बेहतर वित्तीय नतीजाें की खबराें से उत्साह पैदा कर रही हैं. दूसरी ओर,एक शांत लेकिन चिंताजनक स्थिति भी है. जहां कर्मचारियाें की संख्या घट रही है और नई भर्तियां दाे साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है. ये खबरें कमाई और राेजगार के बीच एक खामाेश अलगाव की ओर इशारा करती हैं.
अगर पहली तस्वीर काे ध्यान से देखें, ताे कंपनियाें की निवेशक बैठकाें और विश्लेषकाें के बीच सबसे अधिक चर्चा सिर्फ दाे अक्षराें (ए और आई) की रही. टीसीएस, एचसीएल, टेक, व्रिपाे और टेक महिंद्रा जैसी कम्पनियाें ने मजबूत ऑर्डर बुक और बढ़ती आय का दावा ताे किया, लेकिन इस उत्साह के पीछे एक सच्चाई छिपी थी.
कंपनियाें की आय रुपये में जरुर दाे अंकाें की दर से बढ़ी, कुछ मामलाें में 14 प्रतिशत से भी ज्यादा, पर असलियत यह है कि आईटी और साॅफ्टवेयर कंपनियां डाॅलर में कमाई करती हैं. इसलिए, रुपये के कमजाेर हाेने से यह वृद्धि ज्यादा दिखाई दी. अगर रुपये और डाॅलर के बीच कीमत में आए इस बदलाव के असर काे हटा दें, ताे डाॅलर के हिसाब से कमाई में बहुत कम बढ़ाेतरी हुई, जाे लगभग एक से छह प्रतिशत के बीच ही रही.
वहीं, कर्मचारियाें की संख्या पर नजर डालें, ताे तस्वीर और स्पष्ट हाेती है. टीसीएस ने इस तिमाही में लगभग 9,000 कर्मचारी जाेड़े हैं. लेकिन, असल बात यह है कि कुल कर्मचारियाें की संख्या 5.93 लाख है, जाे एक साल पहले के 6.13 लाख के आंकड़े से कम है. विप्राे ने भी घाेषणा की है कि वह इस साल नए इंजीनियरिंग स्नातकाें काे नाैकरी पर नहीं रखेगी. टेक महिंद्रा में कर्मचारियाें की संख्या 1.46 लाख है, जाे एक साल पहले के मुकाबले कम है. एचसीएल, टेक में भी एक वर्ष में करीब 3,200 कर्मचारियाें की कमी आई है. यदि राजस्व वृद्धि और कर्मचारियाें की वृद्धि काे एक साथ देखा जाए, ताे एक तरह का आर्बिट्राज इंडे्नस बनता है, जाे बताता है कि कमाई बढ़ रही है, लेकिन राेजगार नहीं. यह स्पष्ट है कि भारत की आईटी कंपनियां टिके रहने की हाेड़ में हैं और वे खुलकर दांव लगा रही हैं. निवेश अब लाेगाें के बजाय एफआई पर हाे रहा है. कभी सस्ती और बड़ी कार्यश्नित भारत की सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धा ताकत थी, पर अब विकास के लिए उसकी जरुरत पहले जैसी नहीं रही.
अब नई और क्रांतिकारी तकनीकाें के आने से यह माॅडल बदल रहा है. नाैकरियाें की मांग व पूर्ति से पता चलता है कि भर्ती में कमी आई है. काॅलेज प्लेसमेंट पहले ही कमजाेर पड़ चुके थे, अब अनुभवी पेशेवराें के लिए भी अवसर तेजी से घट रहे हैं. धानी, कैरियर की शुरुआत से लेकर ऊंचे पदाें तक, हर स्तर पर राेजगार के माैंके कम हाेते जा रहे है.
जून 2026 की चैलेंजर रिपाेर्ट, जाे भर्ती के रुझान पर नजर रखती है, बताती है कि उस महीने में एआई से जुड़ी 14,000 से ज्यादा नाैकरियाें में कटाैती की घाेषणा की गई थी. इस वर्ष अब तक 1,01,743 नाैकरियाें में कटाैती के पीछे एआई काे वजह बताया गया है, जाे कुल घाेषित छंटनी का लगभग एक-चाैथाई हिस्सा है. किसी बात काे समझने के लिए संदर्भ बहुत जरूरी है. यह बदलाव केवल अमेरिका या यूराेप तक सीमित नहीं है. वैश्विक कंपनियाें में हाेने वाला ऑटाेमेशन सीधे भारत के राेजगार पर असर डालता है. न्यूयाॅर्क या न्यू जर्सी में काेई कंपनी एआई अपनाती है. ताे उसका असर भारत में कर्मचारियाें की छंटनी के रूप में दिख सकता है, क्योंकि मशीनें अब तेजी से इंसानी काम अपने हाथ में ले रही हैं.
एआई का असर कंपनियाें के दांवाें में भी दिखाई देता है. माइक्राेसाॅफ्ट के सीईओ सत्या नड़ेला ने कहा कि एआई 30 प्रतिशत काेड लिख रहा है. ओरेकल ने अपनी सालाना रिपाेर्ट में बताया कि एआई की वजह से 21,000 नाैकरियां कम हाे गईं. सेल्सफाेर्स के सीईओ मार्क बेनिऑफ ने बताया कि एआई एजेंटफाेर्स अब कंपनी की लगभग आधी सर्विस काॅल संभाल रहा है और इसके बाद 4,000 से अधिक पद समाप्त किए गए. जब एआई नया काेड लिखने लगे, ताे बिल याेग्य घंटे और लागत, दाेनाें घटते हैं, जिससे ऑटाेमेशन की रफ्तार और तेज हाे जाती है.
-शंकर अय्यर