प्रश्न-सुभाष बाबू पर पहले भी फिल्में रिलीज हुई हैं. तो आपकी फिल्म में क्या ख़ासियत है..?
उत्तर- हमारी फिल्म जो है यह सुभाष चंद्र बोस के ऊपर आधारित है, इसका नाम है ‘द बोस फाइल्स: सच या साजिश’ अभी तक सुभाष चंद्र बोस के ऊपर हिंदी में दो फिल्में बनी हैं, जो 1920 से शुरू होकर 1945 के प्लेन क्रैश पे ख़त्म हो जाती हैं. लेकिन हमारी फिल्म वो 1945 के प्लेन क्रैश से शुरू होती है.
प्रश्न-इस फिल्म की कहानी का सबसे ज्यादा जोर किन मुद्दों पर है..? इसके लिए क्या शोध (रिसर्च) किया गया है..?
उत्तर - सबसे जो अहम् सवाल है कि 1945 के बाद क्या हुआ..? उनकी वाकई मौत हो गई या वो कहीं और चले गए, या कभी वापस आए थे..? या फिर आए थे तो कहां थे..? अगर भारत में थे तो उनकी वाकई मौत कब हुई..? और उसके बाद में हमारी सरकारों का क्या स्टैंड था..? ख़ासकर हमारी सेंट्रल गवर्नमेंट, स्टेट गवर्नमेंट, रॉ और आईबी का..? हिंदुस्तान टाइम्स के दो जर्नलिस्ट हैं, मिस्टर अनुज धर एंड चंद्रचूड़ घोष, इन्होंने सुभाष चंद्र बोस पर तीन किताबें पब्लिश की हैं. उनके खोजबीन पर आधारित सारे तथ्यों को बुन के हमने एक कहानी बनाई है. यह 2 घंटे 5 मिनट की फिल्म 30 जुलाई को पूरे भारत में 200 थियेटर्स में रिलीज हो रही है. अभी सिर्फ हिंदी में आ रही है इंग्लिश सबटाइटल्स के साथ. बाद में तमिल, तेलुगु और बंगाली, ये तीन भाषाओं में 100% हम डब करना चाहेंगे.
प्रश्न- जब सुभाष बाबू पर पहले ही फिल्में बन चुकी हैं, फिर भी आपको ऐसा क्यों लगा कि उन्हीं पर दोबारा फिल्म बनाई जानी चाहिए..?
उत्तर - हमारी नई पीढ़ी को सुभाष चंद्र बोस के बारे में कुछ खास पता नहीं है और मेरी पीढ़ी को भी स्कूल में जो पढ़ाया गया है वो कभी भी पूरा सच नहीं था. देश में स्वतंत्रता सेनानी बहुत सारे हैं. लेकिन जिन्होंने आजादी के स्वतंत्रता संग्राम में सबसे ज्यादा योगदान दिया, या जिनका बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ा है, तो वो मेरे हिसाब से नेताजी सुभाष चंद्र बोस हैं. लेकिन सरकारों ने उनके बारे में जानकारी को हमेशा छुपा के रखा. हमारी फिल्म के माध्यम से हम उस योगदान को लोगों के सामने रख रहे हैं.
प्रश्न- इस फिल्म में कलाकार कौन हैं, काम कब से शुरु किया था और इसकी शूटिंग कहां हुई है..?
उत्तर - फिल्म में मुख्य भूमिका यतिन कार्येकर निभा रहे हैं. इसके अलावा अखिलेन्द्र मिश्रा, वीरेंद्र सक्सेना, अपूर्वा अरोड़ा, अमित बहल, आकाशदीप अरोड़ा जैसे कलाकारों ने इसमें काम किया है. कहानी के बारे में हमने 2023 से रिसर्च शुरू किया था. फिल्मी की ज्यादातर शूटिंग एमपी में हुई है, मांडू, महेेशर और इंदौर में. फिल्म को मध्य प्रदेश सरकार ने भी सहायता प्रदान की है.
प्रश्न- परिवार की कोई पृष्ठभूमि न होने के बावजूद आपने अचानक फिल्म क्षेत्र में कैसे प्रवेश किया..? क्या इसके पीछे कोई विशेष कारण रहा है..?
उत्तर - कॉलेज के समय में शौकिया तौर पर मैं कविताएं और कहानियां लिखता था. काफी सालों से क्रिएटिव दुनिया से थोड़ा सा रिश्ता है. लेकिन मैं हमेशा उसको टालता आ रहा था कि अभी और कई जिम्मेदारियां है. ऐसा सोचते-सोचते 20-22 साल निकल गए. कोरोना के समय मुझे लगा कि अब नहीं किया तो फिर कभी नहीं हो पायेगा. कोरोना के दौरान जब फैक्ट्री तीन-चार महीने बंद थी, तब हमने इसको एक आजमाने की कोशिश की और मेरी पहली की जो तीन फिल्में हैं, उनको करीबन 22 इंटरनेशनल अवॉर्ड भी मिल चुके हैं. उसके बाद हिम्मत बढ़ती गई.
बिजनेस के साथ सामाजिक कार्यों में अग्रसर राजेश गुप्ता मूल रुप से हरियाणा से हैं, लेकिन उनका जन्म कोलकाता में हुआ है. आईआईटी बॉम्बे में पढ़ाई के बाद वे अब पुणे में सेटल हो गए हैं. उन्होंने पहले दो शॉर्ट फिल्म (चड्डी-बड्डी और द फ्लैट), तथा 2022 में ‘अनलॉक जिंदगी’ फीचर फिल्म बनाई है. क्विक मिक्स ब्रांड से वे यहां बिजनेस चलाते हैं. उनके घर में कोई इस बिजनेस में भी नहीं है और फिल्म लाइन में भी नहीं है. राजेश गुप्ता वर्तमान में अग्रवाल क्लब के वाइस प्रेसिडेंट हैं. इससे पहले वे 2017-18 में रोटरी क्लब ऑफ पुणे डाउनटाउन के भी प्रेसिडेंट रह चुके हैं.
हमने सारे सबूतों के साथ बात रखी है
इस फिल्म में सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि पूरे सबूतों के साथ निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि ये इंसान हमारे बीच में 1985 तक था. उसके सारे सबूत हमारे पास हैं और फिल्म में हमने सारे सबूतों के साथ बात की है. आप जब फिल्म देखेंगे तो आपको आप हॉल में जाने से पहले आपके जो विचार थे और जब आप हॉल से बाहर निकलेंगे तो आपके विचार, मुझे 100% यकीन है कि वो बदल जाएंगे. - राजेश गुप्ता, फिल्म निर्माता, ‘द बोस फाइल्स’