बावधन, 28 जुलाई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) ज्ञानोबा माउली-तुकाराम और जय हरि विट्ठल के जयघोष तथा पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ सूर्यदत्त नेशनल स्कूल में आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर पालकी समारोह बड़े ही उत्साह के साथ संपन्न हुआ. महाराष्ट्र की समृद्ध वारकरी परंपरा के संस्कार नन्हे-मुन्ने छात्रों में सिंचित करने और साथ ही उनमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से इस पालकी समारोह का आयोजन किया गया था. इस अवसर पर पूरा स्कूल परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया. सूर्यदत्त एजुकेशन फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ.संजय बी.चोरडिया एवं उपाध्यक्ष सुषमा चोरडिया के मार्गदर्शन में इस पालकी समारोह का आयोजन किया गया था. छात्रों ने पारंपरिक वारकरी की पोशाक पहनकर दिंडी (शोभायात्रा) में उत्साहपूर्वक भाग लिया. सिर पर तुलसी वृंदावन, हाथों में भगवा पताकाएं, ताल-चिपली (मंजीरे) और विट्ठल के नाम के अखंड जयघोष से स्कूल परिसर में पंढरपुर की वारी का एक जीवंत दृश्य उभर आया. छोटे-छोटे बच्चों द्वारा प्रस्तुत अभंग, भक्तिगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वहां मौजूद अभिभावकों और शिक्षकों का दिल जीत लिया. इस वर्ष के पालकी समारोह का विशेष आकर्षण ‘जल संरक्षण का सामाजिक संदेश’ था. छात्रों का विभिन्न गतिविधि-आधारित गतिविधियों के माध्यम से मार्गदर्शन किया गया. सूर्यदत्त के संस्थापक- अध्यक्ष डॉ. संजय चोरडिया ने कहा, ऐसे आयोजनों के माध्यम से छात्रों में सामाजिक जिम्मेदारी, सांस्कृतिक गर्व व पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को अधिक मजबूत करने का स्कूल का निरंतर प्रयास रहता है. छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली का समन्वय करने वाली विभिन्न गतिविधियां लगातार आयोजित की जाती हैं.