पुणे, 29 जुलाई (आ.प्र.) हर क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उपयोगी है. लेकिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता की कुछ सीमाएं भी हैं. मीडिया को यह तकनीक समाचार बनाकर दे देगी, लेकिन उस समाचार में नवीनता है या नहीं, यह परखना होगा. क्योंकि इस तकनीक के माध्यम से एकत्रित की गई जानकारी से ही कोई खबर मिल सकती है. समाचार में नवीनता लाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ-साथ मानवीय बुद्धिमत्ता का उपयोग करना आवश्यक है. ऐसा होने पर ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग मीडिया में बेहतर तरीके से हो सकेगा, यह विचार सावित्रीबाई फुले पुणे वेिशविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरेश गोसावी ने व्यक्त किए. उन्होंने वेिशविद्यालय में ‘मीडिया इनक्यूबेशन सेंटर’ और मशांतनुराव किर्लोस्कर अध्यासनफ शुरू करने का ओशासन भी दिया. सावित्रीबाई फुले पुणे वेिशविद्यालय के संचार एवं समाचार पत्र विद्या विभाग, पुणे श्रमिक पत्रकार संघ, पुणे पत्रकार प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वावधान में और सावित्रीबाई फुले पुणे वेिशविद्यालय के विद्यार्थी विकास मंडल के सहयोग से पुणे मैनेजमेंट एसोसिएशन के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (मीडिया एंड एंटरटेनमेंट) द्वारा मंगलवार को ‘पत्रकारिता, मीडिया एंटरप्रेन्योरशिप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया था. श्रमिक पत्रकार संघ के सभागार में आयोजित इस कार्यशाला का उद्घाटन डॉ. सुरेश गोसावी ने किया. मंच पर पुणे पत्रकार प्रतिष्ठान के अध्यक्ष शैलेश काले, पुणे श्रमिक पत्रकार संघ के अध्यक्ष उमेश शेलके, पुणे मैनेजमेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रदीप तुपे, संचार एवं समाचार पत्र विद्या विभाग के प्रमुख डॉ. संजय तांबट, प्रसाद मिरासदार, वरिष्ठ लेखक एवं विचारक डॉ. अच्युत गोडबोले उपस्थित थे. डॉ. सुरेश गोसावी ने आगे कहा, एक मीडिया प्रतिनिधि द्वारा किसी व्यक्ति से बात निकलवाने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से बात निकलवाने में बहुत अंतर है. सवाल यह है कि क्या एआई उपकरण आपसे उस तरह से बात करवा सकता है. कार्यशाला में एआई विशेषज्ञ डॉ. भूषण केलकर ने ‘एआई युग में करियर : अवसर और चुनौतियां’ विषय पर, थिंक बैंक के संस्थापक विनायक पाचलॉग ने ‘डिजिटल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ विषय पर, तथा एआई विशेषज्ञ डॉ. अमेय पांगारकर ने ‘पत्रकारिता, मीडिया एंटरप्रेन्योरशिप और एआई टूल्स’ विषय पर मार्गदर्शन किया.