नई दिल्ली, 30 जुलाई (वि.प्र.)
देश में हर दिन 171 कराेड़ रुपय का टाेल कले्नशन हाे रहा है. तीन साल में लगभग 2 लाख कराेड़ की वसूली हुई.
6574 कराेड़ के साथ यूपी देश में पहले ताे 6103 कराेड़ के कले्नशन के साथ महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर रही. यह जानकारी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने दी. पिछले तीन सालाें में राष्ट्रीय राजमार्गाें से फास्टटैग के जरिए करीबन 1.87 लाख कराेड़ रुपये से अधिक का टाेल वसूला गया है. इस राशि में लगातार बढ़ाेतरी हाे रही है. अगर इस कलेक्शन पर राेजाना के टाेल वसूली पर गाैर करे ताे राेजाना 171 कराेड़ रुपये का टाेल फास्टटैग से छकख ने वसूला. अब सवाल यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग से जितना भी टाेल मिलता है क्या वह राज्य सरकाराें काे भी मिलता है, ताे इसका जवाब है नहीं.
यह सीधे भारत सरकार की कंसाेलिडेटेड फंस में जाता है. फिर बजटीय आवंटन के जरिए पूरे देश में राष्ट्रीय राजमार्गाें के निर्माण, रखरखाव और विस्तार पर खर्च किया जाता है. कुछ समय पहले केरल ने यह मांग उठाई थी कि उसने राष्ट्रीय राजमार्गाें के विकास में लगभग 5,800 कराेड़ रुपये का याेगदान दिया है. इसलिए उसे टाेल का हिस्सा मिलना चाहिए. लेकिन सरकार ने कहा कि किसी राज्य काे अलग से टाेल राजस्व देने की काेई नीति नहीं है.
हालांकि सरकार ने माना कि केरल में भूमि अधिग्रहण की लागत लगभग 23,350 कराेड़ रुपये रही. राज्य के याेगदान से परियाेजनाओं काे प्राथमिकता मिली. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 28 जुलाई काे कांग्रेस के राज्यसभा सांसद के सवाल के जवाब में बताया कि इलेक्ट्राॅनिक टाेल कलेक्शन सिस्टम फास्टटैग से हाेने वाली आय भी लगातार बढ़ रही है. 2023-24 में 55,882.12 कराेड़ रुपये की आमदनी हुई थी. 2024-25 में 61,408.15 कराेड़ और 2025-26 में 70,278.18 कराेड़ रुपये मिले थे. यानी केवल तीन वर्षाें में फास्टटैग के माध्यम से 1,87,568.45 कराेड़ रुपये का टाेल वसूला जा चुका है.
सरकार के मुताबिक 16 फरवरी 2021 से राष्ट्रीय राजमार्गाें के सभी टाेल प्लाजा काे फास्टटैग आधारित बनाया गया.