सत्य के सूक्ष्म सूत्रों को पकड़ने का हम प्रयास करें

जीवन धारा

    31-Jul-2026
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btrendrasel 
मेरी इच्छा थी कि मैं मनुष्य के हृदय काे समझ सकूं, यह जान सकूं कि तारे क्यों चमकते हैं और ब्रह्मांड किस नियम से संचालित हाेता है. मैं सत्य के उन सूक्ष्म सूत्राें काे पकड़ना चाहता था, जाे दृश्य और अदृश्य जगत काे जाेड़ते हैं.
- बर्ट्रेंड रसेल.

 मेरे जीवन के तीन सरल, किंतु अत्यंत प्रबल अभिलाषाओं ने संचालित किया है- प्रेम की आकांक्षा, ज्ञान की खाेज और मानव जाति के दुख के प्रति असहनीय करूणा. ये तीनाें मेरे जीवन में ऐसे प्रभावित हुए हैं, जैसे प्रचंड वायु के झाेंके, जिन्हाेंने मुझे इधरउधर, अनिश्चित दिशाओं तथा वंदना के विशाल सागर में भटकाया है, यहां तक कि कभी-कभी में निराशा के अंतिम छाेर तक जा पहुंचा हूं.
सबसे पहले मैंने प्रेम की तलाश की, क्योंकि वह ऐसा परमानंद देता है, जिसके कुछ ही क्षणाें के लिए मैं जीवन की सारी उपलब्धियां न्याैछावर कर सकता था. प्रेम की खाेज इसलिए भी की, क्योंकि वह उस भयानक अकेलेपन काे कम करता है, जिसमें एक कांपती हुई चेतना किनारे खड़ी हाेकर शून्य, ठंडे व निस्संग अंधकार काे निहारती है. वह अकेलापन आत्मा काे भीतर तक जमा देता है और मनुष्य काे स्वयं से दूर कर देता है. मैंने प्रेम इसलिए भी चाहा, क्योंकि उसके मिलन में मुझे एक रहस्यमयी झलक दिखाई देती थी, मानाे संताें और कवियाें द्वारा कल्पित स्वर्ग का सूक्ष्म पूर्वाभास हाे. यही वह अनुभूति थी, जिसकी मैंने कामना की और अंतत: मैंने उसे पा लिया. उस प्राप्ति ने मेरे अंतर्मन में एक मधुर शांति और कृतज्ञता का संचार किया.
 
उतनी ही तीव्रता से मैंने ज्ञान की खाेज भी की.
मेरी इच्छा थी कि मैं मनुष्य के हृदय काे समझ सकूं, उसके भावाें और द्वंद्वाें काे जान सकूं. मैं यह जानता था कि आकाश में तारे क्यों चमकते हैं और ब्रह्मांड की व्यवस्था किस नियम से संचालित हाेती है. मैं सत्य के उन सूक्ष्म सूत्राें काे पकड़ना चाहता था, जाे दृश्य और अदृश्य जगत काे जाेड़ते है. यह बाैद्धिक जिज्ञासा मेरे लिए केवल जानकारी प्राप्त करना नहीं थी, बल्कि आत्मा की तृप्ति का माध्यम भी थी. यद्यपि मैं इस दिशा में बहुत अधिक सफलता प्राप्त नहीं कर सका, फिर भी जाे थाेड़ा बहुत समझ पाया, उसने मेरे जीवन काे आलाेकित किया और मेरे विचाराें काे व्यापकता दी.
 
प्रेम और ज्ञान मुझे ऊर्ध्व दिशा में, मानाे स्वर्ग की ओर ले गए. किंतु करूणा ने मुझे बार-बार धरती पर लाैटा दिया. पीड़ा की प्रतिध्विनियां मेरे हृदय में गूंजती रहीं और मुझे चैन से बैठने न दिया. अकाल से पीड़ित बच्चे, अत्याचार सहते निर्दाेष लाेग, असहाय वृद्ध, जाे अपने ही परिवार पर बाेझ समझे जाते हैं, और संसार में व्याप्त अकेलापन, ये सब उस आदर्श जीवन का उपहास करते प्रतीत हाेते हैं, जिसकी कल्पना हम करते हैं. जब भी मैं सुख और शांति के शिखर पर पहुंचना चाहता हूं, मानव दुख की पुकार मुझे नीचे खींच लाती है. मैं इसे कम करना चाहता हूं, परंतु अपनी सीमाओं के कारण असमर्थ रहता हूं, और इसी असमर्थता में स्वयं भी पीड़ा का अनुभव करता हूं. फिर भी आशा की एक सूक्ष्म ज्याेति मेरे भीतर निरंतर जलती रहती है. यही मेरा जीवन रहा है. और यदि मुझे फिर अवसर मिले, ताे मैं इसे उसी प्रकार पुन: जीना चाहूंगा.
 
सूत्र : जीवन काे अर्थपूर्ण बनाएं
अर्थपूर्ण जीवन वही है, जिसमें हम लाेगाें से सच्चे दिल से प्रेम करें, लगातार सीखते रहें और दूसराें के दुख काे अपना समझकर उसे कम करने का हरसंभव प्रयास करें. यही तीनाें भाव मनुष्य काे ऊंचा उठाते हैं, उसे संवेदनशील बनाते हैं, और उसके अस्तित्व काे अर्थ, गरिमा तथा प्रकाश से भर देते हैं.