पिंपरी, 30 जुलाई (आ.प्र.)
मनपा की हाल ही में आयाेजित हुई साधारण सभा में प्रशासन के याेजनाहीन कामकाज की पाेल खुल गई है. शहर के विस्तार काे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने आठ के बजाय दस क्षेत्रीय कार्यालय बड़ी धूमधाम से शुरू ताे कर दिए, लेकिन वहां बैठने के लिए आवश्यक अधिकारियाें और कर्मचारियाें की तैनाती ही नहीं की गई, यह गंभीर मामला सामने आया है. नगरसेवकाें ने इस मुद्दे पर प्रशासन काे जमकर आड़े हाथाें लिया और कड़ा सवाल उठाया, जब अधिकारी ही नहीं थे, ताे दस कार्यालय शुरू करने की इतनी जल्दबाजी क्याें की गई? मनपा के चुनाव जनवरी महीने में संपन्न हुए थे.
इन चुनावाें में बीजेपी काे पिंपरी-चिंचवड़ में एकतरफा बहुमत मिला. 84 नगरसेवक चुने जाने के बाद, विपक्षी पार्टी काे काेई भी पद न मिले, यह रणनीति अपनाते हुए शहर में आठ प्रभाग कार्यालयाें काे बढ़ाकर 10 करने का प्रस्ताव रखा गया था. उसी के अनुसार हाल ही में हुई साधारण सभा में दस क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव मंजूर किया गया था. लेकिन वास्तव में, क्षेत्रीय कार्यालयाें में पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध न हाेने के कारण मनपा का कामकाज पूरी तरह ठप पड़ा है. जलापूर्ति, ड्रेनेज, सड़कें, प्राॅपर्टी टै्नस, निर्माण अनुमति, जन्म- मृत्यु प्रमाण पत्र, अतिक्रमण, स्वच्छता और स्वास्थ्य जैसी बेहद महत्वपूर्ण और मूलभूत सुविधाओं के लिए शहर के सैकड़ाें नागरिकाें काे प्रतिदिन क्षेत्रीय कार्यालयाें के च्नकर काटने पड़ रहे हैं. अधिकारियाें के माैजूद न रहने और कर्मचारियाें की कमी के कारण नागरिकाें के आवेदन हफ्ताें से लंबित पड़े हैं. प्रशासन की इस उदासीनता से परेशान नागरिक अब सीधे जनप्रतिनिधियाें से सवाल कर रहे हैं, जिससे नगरसेवकाें काे बेवजह जनता के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये की कड़ी निंदा करते हुए तुरंत कदम उठाने की मांग की गई है. नगरसेवकाें ने सभा में आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि बढ़ती आबादी के हिसाब से प्रशासनिक व्यवस्था काे मजबूत किया जाए और सभी खाली पदाें काे जल्द से जल्द भरकर नागरिकाें काे बिना किसी परेशानी के समय पर सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं.