शवाजीनगर, 30 जुलाई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
पर्यावरण संरक्षण के दावाें के बीच पुणे मनपा की पर्यावरण स्थिति रिपाेर्ट 2025- 26 ने शहर की पर्यावरणीय व्यवस्था की गंभीर खामियाें काे उजागर कर दिया है.
शहर प्रदूषण की चपेट में हाेने की बात स्पष्ट हाे गई है. बुधवार काे मनपा आयुक्त नवल किशाेर राम ने महापाैर मंजूषा नागपुरे काे 298 पृष्ठाें की यह रिपाेर्ट साैंपी. इस अवसर पर उपमहापाैर परशुराम वाड़ेकर, सभागृह नेता गणेश बिड़कर, स्थायी समिति अध्यक्ष श्रीनाथ भिमाले, विपक्ष के नेता एड. नीलेश निकम, कांग्रेस के गुटनेता चंदूशेठ कदम, राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) के गुटनेता साेपान उर्फ काका चव्हाण, शिवसेना के गुटनेता नितिन गावड़े, अतिरिक्त आयुक्त पवनीत काैर, प्रजीत नायर तथा ओमप्रकाश दिवटे उपस्थित थे.
रिपाेर्ट के अनुसार शहर में प्रतिदिन लगभग 980 मिलियन लीटर सीवेज उत्पन्न हाेता है, जबकि मनपा के नाै सीवेज शाेधन संयंत्राें की कुल क्षमता केवल 477 मिलियन लीटर है. अर्थात केवल 49 प्रतिशत सीवेज का ही शाेधन हाे पा रहा है, जबकि शेष सीवेज के नदियाें अथवा पर्यावरण में मिलने का खतरा बना हुआ है. मुंढवा स्थित शाेधन केंद्र के वैधानिक मानकाें का पालन न करने तथा कुछ संयंत्राें काे महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा ‘नाॅन-कम्प्लायंट’ घाेषित किए जाने का भी उल्लेख किया गया है. मुला-मुठा नदी काे प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए ‘परम’ परियाेजना के अंतर्गत 11 नए सीवेज शाेधन संयंत्राें का निर्माण जारी है, जिनसे 396 मिलियन लीटर अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हाेगी.
जलापूर्ति व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है. शहर काे प्रतिवर्ष 21.03 टीएमसी पानी की आवश्यकता है, जबकि स्वीकृत काेटा केवल 16.36 टीएमसी है. इसके अतिरिक्त वितरण व्यवस्था में 32 प्रतिशत पानी रिसाव और गैर-राजस्व उपयाेग में नष्ट हाे रहा है. समान जलापूर्ति याेजना पर अब तक 1,557 कराेड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं और 85 प्रतिशत कार्य पूरा हाेने का दावा किया गया है. दाे लाख से अधिक स्मार्ट जलमीटर लगाए गए हैं तथा कुछ क्षेत्राें में जल रिसाव 40 प्रतिशत से घटकर 29 प्रतिशत हाेने का दावा भी किया गया है.
इसके बावजूद शहर में औसत जलापूर्ति प्रतिदिन केवल चार घंटे ही हाे रही है.
रिपाेर्ट में वायु प्रदूषण काे भी गंभीर चिंता का विषय बताया गया है. पीएम 2.5, पीएम 10 तथा नाइट्राेजन डाइऑक्साइड के स्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है.
शिवाजीनगर, पाषाण, कात्रज, लाेहगांव तथा सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय क्षेत्र में प्रदूषण राष्ट्रीय मानकाें से अधिक पाया गया. वर्षभर में 31 दिन वायु गुणवत्ता ‘खराब’, 120 दिन ‘मध्यम’ तथा 122 दिन ‘संताेषजनक’ श्रेणी में दर्ज की गई.
1,600 नागरिकाें पर किए गए सर्वेक्षण में 49 प्रतिशत लाेगाें ने शहर के पर्यावरण की स्थिति काे ‘खराब’ अथवा ‘अत्यंत खराब’ बताया. नागरिकाें ने वृक्षाराेपण, शहरी वनीकरण, सुदृढ़ सार्वजनिक परिवहन तथा ठाेस कचरा प्रबंधन काे सर्वाे च्च प्राथमिकता देने की मांग की. मनपा ने पर्यावरण सुधार के लिए 60 सिफारिशें, 11 नए शाेधन संयंत्र, 535 विद्युत बसाें का संचालन तथा विद्युत वाहनाें के पंजीकरण में 62 प्रतिशत वृद्धि का दावा किया है.
हालांकि रिपाेर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि बढ़ते प्रदूषण, अपर्याप्त सीवेज शाेधन और जल रिसाव जैसी समस्याओं के समाधान के लिए अब केवल याेजनाएं नहीं, बल्कि प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है.